बरेली: बाजार अनलाक पर खर्चों ने तोड़ी ट्रांसपोर्ट कारोबार की कमर
बरेली, अमृत विचार। कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप थम चुका है। बाजार भी पूरी तरह खुल चुके हैं लेकिन डीजल और टोल टैक्स के दामों में बढ़ोतरी ने ट्रांसपोर्टस की कमर तोड़कर रख दी है। आमदनी के सापेक्ष खर्चे अधिक होने से 50 फीसदी गाड़ियां खड़ी हुई हैं। वहीं, दूसरी तरफ कच्चे माल की …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप थम चुका है। बाजार भी पूरी तरह खुल चुके हैं लेकिन डीजल और टोल टैक्स के दामों में बढ़ोतरी ने ट्रांसपोर्टस की कमर तोड़कर रख दी है। आमदनी के सापेक्ष खर्चे अधिक होने से 50 फीसदी गाड़ियां खड़ी हुई हैं। वहीं, दूसरी तरफ कच्चे माल की आवक कम होने के कारण वाहनों के लिए माल भी दूसरे राज्यों में पहुंचे वाहनों के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। ट्रांसपोर्ट से जुड़े कारोबारियों का कहना है पहले लाकडाउन अब अनलाक में भी कारोबार को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले में बात करें तो करीब दो हजार लोडर वाहन हैं। ये वाहन दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान, बंगाल, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लिए हर रोज चलते हैं। बाहर से कच्चा माल भी लेकर आते हैं लेकिन इन दिनों संक्रमण के चलते जिले में कच्चे माल की आवक भी कम है। इस कारण यहां फैक्टरियों में माल भी तैयार नहीं हो पा रहा है। काफी कम वाहनों को ही भाड़ा मिल पा रहा है।
जिले से इन-दिनों सब्जी और नमकीन आदि सामान की दूसरे शहरों और राज्यों के लिए आपूर्ति हो रही है। इसके अलावा डीजल के रेट 87 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गए हैं। टोल टैक्स पर हर रोज कीमतों में इजाफा हो रहा है। इस कारण गाड़ियों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है। वहीं, सबसे बड़ी दिक्कत उनकी है। जिन कारोबारियों के वाहनों पर कर्ज है, उन्हें दूसरे शहरों में फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी पकड़ रहे हैं और अवैध वसूली कर रहे हैं।
इस वजह से भी ट्रांसपोर्ट कारोबारी खासे परेशान हैं। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शोभित सक्सेना का कहना है कि बाहर से कच्चा माल न आने के कारण यहां भी फैक्टरियों में माल तैयार नहीं हो पा रहा है। खर्चा बढ़ गया है। भाड़े में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस कारण वाहनों का संचालन भी प्रभावित है। ट्रांसपोर्ट कारोबार को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
पिछली साल भी ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। बाहरी राज्यों में अधिकांश फैक्ट्रियां बंद पड़ीं हैं। अनलाक में भी 30 प्रतिशत ट्रक ही इस समय चल रहे हैं। ट्रकों के पहिये थमने से ट्रांसपोर्टर काफी परेशान है। सरकार को रोड टैक्स आदि मांगें माननी होगी। तभी कुछ राहत मिल सकती है। -बंटी , ट्रांसपोर्टर
सरकार मांगे मानने को तैयार नहीं है। लाकडाउन में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को भारी क्षति हुई है। प्लाईवुड, गत्ता फैक्ट्री समेत तमाम उद्योगों के बंद होने से 700 से अधिक ट्रकों के पहिये थमे हैं। लाकडाउन अवधि में करीब 300 करोड़ का नुकसान पहुंचने का अनुमान है। – हरीश बिग, अध्यक्ष , किला ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
