हल्द्वानी: पहली बार भाजपा ने युवा हाथों में सौंपी नेतृत्व की कमान
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। 20 साल के उत्तराखंड में पहली बार सत्ता की बागडोर किसी युवा के हाथों में आई है। अब तक भाजपा रही हो या कांग्रेस दोनों ही दल वरिष्ठ नेताओं को ही नेतृत्व सौंपने पर भरोसा जताते रहे हैं। पहली बार अपेक्षाकृत युवा मुख्यमंत्री बनने से नौजवानों के सपनों को भी फिर पंख …
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। 20 साल के उत्तराखंड में पहली बार सत्ता की बागडोर किसी युवा के हाथों में आई है। अब तक भाजपा रही हो या कांग्रेस दोनों ही दल वरिष्ठ नेताओं को ही नेतृत्व सौंपने पर भरोसा जताते रहे हैं। पहली बार अपेक्षाकृत युवा मुख्यमंत्री बनने से नौजवानों के सपनों को भी फिर पंख लगे हैं।
राज्य गठन के बाद अंतरिम सरकार से लेकर अब तक उम्रदराज नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया जाता रहा है। अंतरिम सरकार के सीएम नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी हो या इसके बाद आई कांग्रेस सरकार में एनडी तिवारी। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही दलों ने वरिष्ठ नेताओं को ही नेतृत्व सौंपने पर भरोसा जताया।
वरिष्ठ नेताओं के मुख्यमंत्री बनने की फेहरिस्त बीसी खंडूड़ी से लेकर रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत और फिर तीरथ सिंह रावत तक लंबी है। हालांकि जब निशंक मुख्यमंत्री बने थे, तब वे अन्य मुख्यमंत्रियों की तुलना में युवा माने गए थे। लेकिन युवा राज्य में पहली बार किसी युवा के हाथ नेतृत्व की कमान सौंपी गई है। इसके साथ ही भाजपा हाईकमान ने युवा को नेतृत्व सौंपकर भावी चुनावी रणनीति के भी संकेत दिए हैं। गौरतलब है कि अलग राज्य गठन में युवाओं की बड़ी भूमिका रही। राज्य की बड़ी आबादी युवा है। बेरोजगारी युवाओं की बड़ी समस्या है। बेरोजगारी को लेकर काफी तादाद में युवा दूसरे राज्यों में पलायन भी कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री आयु
नित्यानंद स्वामी 72
भगत सिंह कोश्यारी 59
एनडी तिवारी 76
बीसी खंडूड़ी 72
रमेश पोखरियाल 49
विजय बहुगुणा 65
हरीश रावत 65
त्रिवेंद्र सिंह रावत 56
तीरथ सिंह रावत 56
पुष्कर सिंह धामी 45
युवाओं के साथ ही पूर्व सैनिकों को साधने का प्रयास
हल्द्वानी। पहली बार युवा विधायक को राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा हाईकमान ने अपनी चुनावी रणनीति के भी संकेत दिए हैं। पहली बार युवा के हाथों में राज्य की बागडोर सौंपकर भाजपा ने उत्तराखंड की युवा आबादी को साधने का प्रयास किया है। इसके साथ ही एक पूर्व सैनिक के बेटे को सीएम बनाकर पूर्व सैनिकों को भी अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। बता दें कि उत्तराखंड एक सैन्य बहुल राज्य है।
दिग्गज सहयोगियों से सामंजस्य बिठाने की चुनौती
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री बनने के बाद धामी के सामने अपने दिग्गज सहयोगियों से सामंजस्य बिठाने की चुनौती रहेगी। मौजूदा मंत्रीमंडल के दिग्गज सतपाल महाराज, बिशन सिंह चुफाल, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, बंशीधर भगत, यशपाल आर्य का अगली कैबिनेट में भी स्थान पक्का है। इन काफी अनुभवी और उम्रदराज सहयोगियों को साधकर सरकार चलाना बड़ी चुनौती रहेगा। धामी अपने वरिष्ठ सहयोगियों से अपनी उम्र के पड़ाव और फासले को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
धामी को नहीं मिली कोई चुनौती
हल्द्वानी। धामी को विधायक दल की बैठक में कोई चुनौती नहीं मिली। केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि बैठक में सिर्फ धामी के नाम का ही प्रस्ताव आया। यानी हाईकमान ने पहले ही तय कर लिया था कि युवा धामी को कमान सौंपनी है। विधायकों और नेताओं को इस बारे में व्हिप जारी किया गया था।
भाजपा ने राहुल गांधी की मंशा को दी मात
हल्द्वानी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर युवाओं को राजनीति और नेतृत्व में आगे लाने की हिमायत करते हैं। इसको लेकर वह तमाम बयान भी दे चुके हैं। लेकिन युवा को कमान सौंपने की राहुल की मंशा को भाजपा ने मात दे दी है। उत्तराखंड में युवा को सीएम बनाने के बाद भाजपा इस मामले में कांग्रेस से बाजी मार ली है। भाजपा विधानसभा चुनाव में भी अपनी इस चाल का फायदा उठा सकती है।
