दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी: एक वादा जो कभी पूरा न हो सका…

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Edited By Amrit Vichar
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मुंबई। रील लाइफ में तो दिलीप कुमार के साथ घटनाएं होती ही रहती थीं लेकिन हैरानी तब हुई जब रियल लाइफ में हुई घटना भी लोगों के लामने आई। यह बात तब की है जब उनके दिल ने उन्हें धोखा दिया। जब उन्हें मधुबाला से प्यार हुआ। दिलीप कुमार और मधुबाला के प्यार की शुरुआत …

मुंबई। रील लाइफ में तो दिलीप कुमार के साथ घटनाएं होती ही रहती थीं लेकिन हैरानी तब हुई जब रियल लाइफ में हुई घटना भी लोगों के लामने आई। यह बात तब की है जब उनके दिल ने उन्हें धोखा दिया। जब उन्हें मधुबाला से प्यार हुआ। दिलीप कुमार और मधुबाला के प्यार की शुरुआत एक गुलाब के फुल से हुई, लेकिन इस फूल ने इन दोनों के रास्तों में कांटे बिछा दिए थे।

साल 1951 में दिलीप कुमार और मधुबाला ने एक फिल्म की शूटिंग के दौरान साथ काम किया था। लेकिन इस वक्त दिलीप कुमार को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मधुबाला उनसे मन ही मन प्यार करती हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान मधुबाला ने अपनी दोस्त मेकअप आर्टिस्ट द्वारा दिलीप कुमार को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें मधुबाला ने अपने प्यार का इज़हार करते हुए उर्दू में लिखा कि- अगर आप मुझे चाहते हैं तो ये गुलाब क़बूल फरमाइए, वरना इसे वापस कर दीजिए। इसके बाद दिलीप कुमार ने मधुबाला के प्यार की निशानी को रख लिया। इसके बाद इन दोनों की प्रेमकहानी शुरू हुई।

मुगल-ए-आज़म से शुरु हुआ प्यार की कहानी का पहला चेपटर
मुगल-ए-आज़म उस समय में सिनेमा के इतिहास में सबसे हिट रही है। इस फिल्म में मधुबाला और दिलीप कुमार की रियल लाइफ की प्रेम कहानी शुरु हुई। मुगल-ए-आज़म की शूटिंग पूरी होने में लगभग 10 साल लगे। इस फिल्म के साथ-साथ दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी भी शुरू हुई, सीढ़ियों पर भी चढ़ी और खत्म भी हुई। मुगल-ए-आज़म की शूटिंग के दौरान जब दिलीप कुमार की शूटिंग नहीं भी होती थी तब भी दिलीप कुमार शूटिंग के सेट पर जाया करते थे और वहीं चुपचाप खड़े होकर मधुबाला की शूटिंग देखा करते थे। दोनों आपस में बात न भी कर पाएं तब भी आंखों ही आंखों में बात कर लिया करते थे।

मुगल-ए-आज़म जब शुरू हुई तब सिनेमा इंडस्ट्री की कई अभिनेत्रियों को छोड़कर मधुबाला को अनारकली के रोल के लिए लिया गया, क्योंकि शहज़ादे सलीम का रोल दिलीप कुमार कर रहे थे। दोनों का प्यार साफ-साफ शूटिंग के दौरान सबको दिखाई दे रहा था। प्यार का असर इतना गहरा हो रहा था कि दिलीप कुमार ने अपनी बड़ी बहन को विवाह के लिए रिश्ता लेकर मधुबाला के घर भेज दिया। लेकिन किस्मत को शायद यह मंज़ूर नही था।

मधुबाला के पिता ने इस रिश्ते के लिए साफ़ मना कर दिया। जिसके बाद मधुबाला के लिए जान से भी ज़्यादा प्यारे पिता और दिलीप कुमार में से किसी एक को चुनना बहुत मुश्किल हो गया। इसके बाद जैसे-जैसे दिन गुज़रते गए वैसे-वैसे दोनों का रिश्ता भी कमज़ोर पड़ता गया। इसके बाद साल 1956 में एक ऐसा मोड़ आया जिसके बाद शायद यह रिश्ता कभी उभर ही नहीं पाया।

एक शर्त की वजह से हुए दोनों अलग
एक फिल्म की शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार ने मधुबाला से कहा कि वो आज ही उनसे शादी करना चाहते हैं और उन्होंने कहा कि शादी की सारी तैयारी हो गई है। इसी के साथ दिलीप कुमार ने मधुबाला के सामने हिला देने वाली शर्त रख दी। दिलीप कुमार ने अपनी शर्त में कहा कि उनसे शादी करने के लिए मधुबाला को अपने पिता से सारे रिश्ते तोड़ने होंगे, इस शर्त को सुनने के बाद मानों मधुबाला के तो होश ही उड़ गए। जिसके बाद मधुबाला ने एक भी शब्द नहीं कहा।

मधुबाला की चुप्पी देखकर दिलीप कुमार को और भी गुस्सा आ गया। जिसके बाद दिलीप कुमार ने गुस्से में कहा कि अगर मैं आज यहां से गया तो कभी वापस लौट कर नहीं आऊंगा। इतना सुनने के बाद भी मधुबाला बिल्कुल चुप रहीं, जिसके बाद दिलीप कुमार को और गुस्सा आ गया फिर देखते ही देखते दिलीप कुमार मधुबाला के सामने से उठे और वहां से चले गए। इसके बाद दिलीप कुमार मधुबाला की जिंदगी से हमेशा के लिए चले गए।

किस्सा मुगल-ए-आज़म और थप्पड़ की गूंज
दिलीप कुमार और मधुबाला अलग तो हो गए थे लेकिन मुगल-ए-आज़म का किस्सा तो अभी बचा हुआ था। शूटिंग अभी बची थी। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक सीन में थप्पड़ की ऐसी गूंज सुनाई दी कि वहां मौजूद सभी लोग दंग रह गए। मुगल-ए-आज़म के एक बेहद खास सीन की शूटिंग होनी थी, जिसमें शहज़ादे सलीम को अनारकली को एक थप्पड़ मारना होता है। यह सीन तब शूट हुआ जब दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच बिल्कुल बात नहीं होती थी। जब यह सीन शूट हो रहा था तब दिलीप कुमार ने प्यार में मिली रुसवाई और गुस्से के जज़्बात उभर आए। जिसके बाद सीन के दौरान दिलीप कुमार ने बड़ी तेज़ी के साथ अनारकली के थपप्ड़ रख दिया।

एक वादा जो कभी पूरा न हो सका
मधुबाला साल 1966 में बहुत बीमार हो गई थीं। बीमार होने के कारण उन्होंने दिलीप कुमार को मिलने के लिए बुलाया। इस मुलाकात में मधुबाला दिलीप कुमार से दोबारा साथ में फिल्मों में काम करने को कहती हैं। दिलीप कुमार ने मधुबाला की गंभार हालत को देखते हुए मधुबाला को वचन दिया कि उनके ठीक होने के बाद वो फिर से उनके साथ काम करेंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बीमार होने के कारण मधुबाला का निधन हो गया और यह वादा कभी पूरा नहीं हो सका।

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