अल्मोड़ा: अजय ने सूझबूझ से पाया सफलता का शिखर
बृजेश तिवारी, अल्मोड़ा। बचपन से ही आर्थिक दिक्कतें और परिवार की जिम्मेदारी। ऊपर से पिता और दो भाईयों को बचपन में ही खो देना का गम। लेकिन आत्मविश्वास को ना कभी टूटने दिया और ना ही कभी मेहनत करना छोड़ा। परिणाम उत्तराखंड की राजनीति में एक कद्दावर नेता के रूप में उभरने के बाद अब …
बृजेश तिवारी, अल्मोड़ा। बचपन से ही आर्थिक दिक्कतें और परिवार की जिम्मेदारी। ऊपर से पिता और दो भाईयों को बचपन में ही खो देना का गम। लेकिन आत्मविश्वास को ना कभी टूटने दिया और ना ही कभी मेहनत करना छोड़ा। परिणाम उत्तराखंड की राजनीति में एक कद्दावर नेता के रूप में उभरने के बाद अब उन्हें मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री के रूप में शामिल हो गए हैं।
हम बात कर रहे हैं रानीखेत में 1 मई 1961 को जन्मे अजय भट्ट की। अपने साहस, मेहनत और सूझबूझ से आज देश की राजनीति में चमकने वाले इस सितारे ने कभी भी नियति के सामने हार नहीं मानी। बचपन में परिवार के सामने पैदा हुई आर्थिक दिक्कतों के बाद भी भट्ट ने कभी अपना हौंसला नहीं छोड़ा। रानीखेत के हैड़ाखान और दूनागिरि के मंदिरों में छोटी छोटी दुकानें लगाकर पूजा के अलावा अन्य सामग्री बेची। साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।
अल्मोड़ा के एसएसजे परिसर मे मैस का संचालन किया और साथ साथ अपनी एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की। एलएलबी पूरा करने के बाद भट्ट ने वकालत शुरू की और नामचीन अधिवक्ताओं में अपना नाम शुमार करवाया। एसएसजे में पढ़ाई के दौरान ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ और बाद में वह सक्रिय राजनीति में भी उतरे।
वर्ष 1985 से वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष समेत अनेक पदों पर रहे। इसी वर्ष वह भाजपा कार्यसमिति के सदस्य भी बने और अल्मोड़ा जिले में उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति, केसरिया वाहिनी, प्रदेश सदस्यता अभियान आदि के प्रमुख भी रहे। संगठन पर अपनी पकड़ के कारण वह जल्दी ही पार्टी में प्रदेश मंत्री और महामंत्री जैसे पदों पर भी काबिज हुए। जबकि बाद में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। वर्ष 1996 में पहली बार उन्होंने रानीखेत से चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
वह उत्तर प्रदेश विधान सभा में लोक लेखा समिति व सीपीए के सदस्य तथा विधान सभा की विशेषाधिकार समिति के सभापति का दायित्व निभा चुके हैं। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने पर भी उन्होंने वर्ष 2002, 2007 और 2012 में चुनाव जीतकर बतौर विधायक उत्तराखंड विधानसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। प्रदेश में जब भी भाजपा की सरकार रही, उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। बतौर मंत्री उन्होंने अपने कार्यकाल में हमेशा शानदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस शासन के दौरान वह नेता प्रतिपक्ष रहे और पूर्व के विधानसभा चुनावों में उन्होंने भाजपा को 57 सीटों पर जीत दिलाकर प्रचंड बहुमत भी दिलवाया। 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत को नैनीताल सीट से करारी पटखनी दी और नैनीताल से सांसद चुने गए।
बतौर सांसद किया शानदार प्रदर्शन
बतौर सांसद अजय भट्ट सदन के कार्यों में काफी सक्रिय दिखाई दिए। दो सत्रों के दौरान वह पंद्रह बहसों और पांच विशेष उल्लेख की चर्चाओं में भागीदारी निभा चुके हैं। सदन में उनकी उपस्थिति 99 प्रतिशत रही है। स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन व रेलवे से जुड़े दस प्रश्न उठाए हैं।
सामाजिक क्षेत्र में भी रहे हैं सक्रिय
राजनीति के अलावा सामाजिक जीवन में भी अजय भट्ट काफी सक्रिय रहे हैं। वह लगातार दस वर्षों तक को ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री रानीखेत के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा वह नागरिक सुरक्षा परिषद, राष्ट्रीय ग्रामोत्थान परिषद, उत्तरांचल हरिजन शिल्प कला उत्थान समिति, नुपूर कला एवं खेल संस्थान, वाल्मीकी समाज, कार सेवा समिति, अंबेडकर मिशन से भी लंबे समय तक जुड़े रहे।
पैतृक गांव में भी खुशी का माहौल
अजय भट्ट के मोदी सरकार में राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद उनके पैतृक गांव द्वाराहाट ब्लॉक के धनखल में भी खुशी का माहौल है। गांव के लोगों और उनके परिजनों का कहना है कि गांव से लेकर केंद्र सरकार की राजनीति में पांव रखने वाले अजय भट्ट ने पूरे देश में गांव का नाम रोशन किया है। ग्रामीणों ने भट्ट की इस उपलब्धि पर उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
1986 में पुष्पा से किया था विवाह
मोदी सरकार में राज्य मंत्री बने अजय भट्ट का विवाह वर्ष 1986 में पुष्पा भट्ट से हुआ था। अजय भट्ट और पुष्पा भट्ट की तीन बेटियां और एक बेटा है। जिनमें से दो वकालत के पेशे से जुड़े हैं। पुष्पा भी वकालत के पेशे से लंबे समय तक जुड़ी रही और प्रदेश की न्यायिक सेवा में कार्य करने के अलावा वह हाईकोर्ट उत्तराखंड में सरकार की वकील भी हैं।
नगरपालिका का लड़ा था पहला चुनाव
मोदी सरकार में राज्य मंत्री बने अजय भट्ट ने अपने जीवन का पहला चुनाव वर्ष 1989 में द्वाराहाट सीट से नगर पालिका क अध्यक्ष के लिए लड़ा था। हालांकि उस समय उनकी किस्मत उन्हें दगा दे गई। अध्यक्ष पद पर अजय भट्ट और प्यारे लाल साह को बराबर मत मिले। बाद में लाटरी से फैसला हुआ था, जिसमें अजय भट्ट हार गए थे। 1996 में वह पहली बार अविभाजित उत्तर प्रदेश में रानीखेत से भाजपा के टिकट पर वह विधायक चुने गए।
अजय भट्ट का प्रोफाइल
नाम – अजय भट्ट
पिता का नाम – कमलापति भट्ट
जन्मतिथि – 1 मई 1961
जन्मस्थान – रानीखेत
शिक्षा – बीए, एलएलबी
व्यवसाय – वकालत
पार्टी से जुड़ाव – विद्यार्थी जीवन में ही विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव, 1980 से सक्रिय सदस्य, पूरा परिवार संघ को समर्पित
पदभार – उत्तर प्रदेश में भाजयुमो के कार्यसमिति के अध्यक्ष रहे।
– भिकियासैंण और रानीखेत तहसील के भाजयुमो संयोजक रहे।
– भाजपा के अल्मोड़ा जिला महामंत्री।
– भाजपा के जिला उपाध्यक्ष, अल्मोड़ा।
– अल्मोड़ा भाजपा कार्यसमिति के 1985 से सदस्य।
– उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष समिति के सदस्य रहे।
– अल्मोड़ा जिले में एकता यात्रा के केसरिया वाहनी के प्रमुख
– अल्मोड़ा पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र के दो बार संयोजक
– सदस्यता अभियान प्रमुख रहे।
– उत्तरांचल प्रदेश में प्रदेश मंत्री रहे ।
– दो बार उत्तराखंड में प्रदेश महामंत्री रहे।
– उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
सामाजिक दायित्व – 10 वर्षों तक को ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री रानीखेत के अध्यक्ष रहे ।
– नागरिक सुरक्षा परिषद के रानीखेत के सचिव रहे ।
– राष्ट्रीय ग्रामोत्थान परिषद के सचिव रहे।
– हरिजन शिल्प कला उत्थान समिति में महासचिव रहे।
– नुपूर कला एवं खेल संस्थान रानीखेत के उपाध्यक्ष रहे।
– वाल्मीकि समाज रानीखेत के संरक्षक रहे।
– राम मंदिर निर्माण के समय कार सेवा समिति के संयोजक रहे।
– अंबेडकर मिशन के सदस्य रहे।
विधायक – 1996 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में रानीखेत विधानसभा से निर्वाचित हुए।
– वर्ष 2002 से 2007 तक और वर्ष 2012 से 2017 तक उत्तराखंड में रानीखेत
विधानसभा से निर्वाचित हुए।
उत्तर प्रदेश सरकार में सरकारी दायित्व – उत्तर प्रदेश विधानसभा में लोक लेखा समिति में सीपीए के सदस्य
– उत्तर प्रदेश विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सभापति।
-उत्तराखंड राज्य बनने के बाद – उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य, आपदा, आबकारी, महिला सशक्तीकरण, संसदीय कार्य, बाल विकास विभाग के मंत्री रहे।
– संयोजक विधान मंडल उत्तराखंड, विधान मंडल दल रहे।
– सभापति, सरकारी आश्वासन समिति उत्तराखंड विधानसभा।
– 2009 से 2011 तक उपाध्यक्ष एनआरएचएम रहे।
– 2012 से 2017 तक नेता प्रतिपक्ष रहे।
– वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में नेता प्रतिपक्ष रहकर भाजपा
को प्रदेश में 57 सीटों पर प्रचंड बहुमत दिलाया।
