अल्मोड़ा: कोरोना संक्रमण के प्रति गंभीर नहीं सरकार

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Edited By Amrit Vichar
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अल्मोड़ा, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के बाद प्रदेश में लगातार हुई मौतों के कारण आज प्रदेश दूसरे स्थान पर आ गया है। लेकिन बैकलॉग मौतों के आंकड़े सामने आने के बाद भी सरकार उन पर गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सरकार की यह लापरवाही जहां प्रदेश के लोगों पर भारी पड़ रही …

अल्मोड़ा, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के बाद प्रदेश में लगातार हुई मौतों के कारण आज प्रदेश दूसरे स्थान पर आ गया है। लेकिन बैकलॉग मौतों के आंकड़े सामने आने के बाद भी सरकार उन पर गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सरकार की यह लापरवाही जहां प्रदेश के लोगों पर भारी पड़ रही है। वहीं सरकार की कार्यप्रणाली से कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों पर भी संशय पैदा हो रहा है।

कोविड से हुई मौतों में उत्तराखंड प्रदेश आज दूसरे नंबर पर आ चुका है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में तीस जून तक 7316 लोगों की मौत हुई। जिनमें से मौत बैकलॉग के 1210 मामले सामने आए हैं। जिनकी जानकारी प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों द्वारा छिपाई गई। सामाजिक संस्था सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के विश्लेषण के बाद बताया है कि प्रदेश के तेरह जिलों के 90 अस्पतालों में 1210 बैकलॉग मृत्यु दर्ज की गई हैं।

जिनमें सबसे अधिक 855 मौतें देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में हुई हैं। जोशी ने कहा है कि अब तक जो आंकड़े सामने आ रहे हैं। उनमें बेस अस्पताल अल्मोड़ा में 45, दून मेडिकल कालेज में 41, हिमालयन अस्पताल में 37, नरेंद्र नगर में 36, एम्स ऋषिकेश में 78, बाबा बर्फानी अस्पताल हरिद्वार में 65 व रुद्रपुर में 65 मौतें सामने आई हैं। लेकिन कोविड से मौत के इतने बड़े बैकलॉग के सामने आने के बाद भी सरकार अस्पतालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसे में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से सरकार कैसे निपटेगी, इस पर आम लोगों में संशय बना हुआ है।

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