बरेली: महिला समूहों का रिकॉर्ड ठीक तो बैंक नहीं कर सकेंगे आनाकानी
बरेली, अमृत विचार। कर्मचारियों के वीआरएस लेने के बाद बीएसएनएल अब संकट में आ गया है। कर्मचारियों की संख्या कम होने से काम में भी दिक्क्त हो रही है। सवा तीन लाख उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ 25 कर्मचारी ही तैनात हैं। कर्मचारियों की कमी से कोई दिनों तक कई टॉवरों व एक्सचेंजों में फाल्ट की …
बरेली, अमृत विचार। कर्मचारियों के वीआरएस लेने के बाद बीएसएनएल अब संकट में आ गया है। कर्मचारियों की संख्या कम होने से काम में भी दिक्क्त हो रही है। सवा तीन लाख उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ 25 कर्मचारी ही तैनात हैं।
कर्मचारियों की कमी से कोई दिनों तक कई टॉवरों व एक्सचेंजों में फाल्ट की मरम्मत भी नहीं हो पा रही है। वहीं बीएसएनएल की संचार सेवा से जुड़े उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं। शहर में खुदाई होने पर सबसे ज्यादा बीएसएनएल की ही लाइन कटती है। इसके कारण कर्मचारियों की कमी से कई दिनों तक उपभोक्ताओं को समस्या होती है।
दरअसल पिछले कई साल से बीएसएनएल घाटे में चल रहा था। इसकी एक बड़ी वजह थी कमाई कम और खर्च ज्यादा। अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर भारी भरकम राशि खर्च होती थी। घाटे से उबरने के लिए 50 साल से अधिक उम्र वालों की छंटनी के लिए वीआरएस योजना लाई गई।
इसके तहत बरेली में तैनात 342 में 177 अफसर और कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया था। बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दिए जाने के बाद बीएसएनएल के कई एक्सचेंजों में कर्मचारियों का टोटा पड़ गया है। एक कर्मी पर एक साथ कई टॉवरों के रखरखाव की जिम्मेदारी देनी पड़ गई है। हालात यह है कि 3.15 लाख मोबाइल उपभोक्ताओं को संभालने के लिए बीएसएनएल के पास सिर्फ 25 कर्मचारी हैं। यही नहीं इन्हीं कर्मियों के जिम्मे 298 एक्सचेंजों और टॉवरों के मेंटीनेंस का भी काम है।
