बरेली: राकेश टिकैत बोले- कृषि कानूनों को हटाने को लेकर गंभीर नहीं सरकार
बहेड़ी/बरेली, अमृत विचार। केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को हटाने के लिए शुरू किए गए आंदोलन को आठ माह ही गुजरे हैं। आजादी पाने को दशकों तक संघर्ष करना पड़ा था। तीनों कानूनों की वापसी बिना किसान दिल्ली छोड़ने वाले नहीं हैं। कृषि आंदोलन के मुखिया व भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश …
बहेड़ी/बरेली, अमृत विचार। केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को हटाने के लिए शुरू किए गए आंदोलन को आठ माह ही गुजरे हैं। आजादी पाने को दशकों तक संघर्ष करना पड़ा था। तीनों कानूनों की वापसी बिना किसान दिल्ली छोड़ने वाले नहीं हैं। कृषि आंदोलन के मुखिया व भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ये बातें बैंक आफ बड़ौदा के निकट स्थित गत्ता फैक्ट्री में आयोजित किसानों की एक सभा में कही।
उन्होंने कहा कि आज देश गड्ढे में गिरता जा रहा है। केंद्र में भाजपा की नहीं, नरेन्द्र मोदी, नीत अडाणी और अंबानी की औद्योगिक सरकार चल रही है। इस दौरान टिकैत ने आरोप लगाया कि नये कृषि कानूनों का बुरा असर देश में जल्द ही दिखाई देने लगेगा। सरकार के साथ उन्होंने विपक्षी दलों पर भी इस मुद्दे पर साथ न देने का आरोप लगाया। किसानों से कहा कि शारीरिक रूप से भले ही कुछ लोग आंदोलन का हिस्सा नहीं बन सके लेकिन दिल से सभी का जुड़ाव बना रहा।
यही इस आंदोलन की मजबूती भी रही। किसानों के संबोधन के बाद टिकैत पीलीभीत के लिए रवाना हो गए। सपा के पूर्व विधायक अताउर्रहमान भी टिकैत की सभा में समर्थकों के साथ पहुंचे। उन्होंने कहा कि आंदोलन में अपनी टीम के साथ वे भी गाजीपुर बार्डर गये थे और जितना उनके स्तर से हो सकता था, करने का प्रयास किया था।
राजनीति पर चर्चा से बचे
राकेश टिकैत ने हाल में ही यूपी में हुए पंचायत चुनाव में कथित तौर पर धांधली बरते जाने के आरोपों पर चुटकी ली पर राजनीति पर बात करने से परहेज किया।
पौन घंटा रुके टिकैत
भाकियू नेता राकेश टिकैत शाम सवा छह बजे गत्ता फैक्ट्री पहुंचे और कृषि कानूनों पर पौन घंटा अपनी बात रखकर विराम ले लिया। सवाल जवाब में भी उन्होंने वहीं बातें दोहराईं, जो किसानों के संबोधन में कही।
