गरमपानी: जंगली जानवरों के आतंक से बचाव को किसान खोज रहे नए उपाय
गरमपानी, अमृत विचार। पर्वतीय किसानों की आय दोगुनी करने के लाख दावे हुए, लेकिन धरातल पर दावे खोखले हैं। आय दोगुनी तो छोड़िए, यहां तो खेत में खड़ी फसल तक सुरक्षित नहीं है। मजबूरी में किसान कामचलाऊ सुरक्षा व्यवस्था के सहारे खेती सुरक्षित कर रहे हैं। कभी लॉकडाउन, कभी कम बारिश से किसान परेशान रहता है। …
गरमपानी, अमृत विचार। पर्वतीय किसानों की आय दोगुनी करने के लाख दावे हुए, लेकिन धरातल पर दावे खोखले हैं। आय दोगुनी तो छोड़िए, यहां तो खेत में खड़ी फसल तक सुरक्षित नहीं है। मजबूरी में किसान कामचलाऊ सुरक्षा व्यवस्था के सहारे खेती सुरक्षित कर रहे हैं।
कभी लॉकडाउन, कभी कम बारिश से किसान परेशान रहता है। इस पर सबसे बड़ी मुसीबत हैं जानवर। जो जरा सी नजर चूकने पर खड़ी फसल चट कर जाते हैं। ऐसे में खेती से मोह भंग होना वाजिब है। कुछ काश्तकार जो खेती कर भी रहे हैं वो भी सरकार और विभागों की हीलाहवाली का दंश झेल रहे हैं।
हाल यह है कि जंगली जानवरों से खेती को सुरक्षित करने के लिए सरकार बार-बार सुअर रोधी दीवार बनाने के खोखले दावे करती है। क्योंकि गांवों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता। जंगली जानवरों से खेती बचाने को गांवो में किसान घर के कपड़े, साड़ियां, धोती आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसान साड़ी, धोती व कपड़ों की घेरबाड़ बना खेती बचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन ये घेरबाड़ जंगली जानवरों का रास्ता नहीं रोक पाते। काश्तकार राजेंद्र सिंह, धाम सिंह, महेंद्र सिंह, हीरा सिंह, भुवन सिंह आदि ने खेती सुरक्षित करने को तारबाड़ की मांग की है।
