हल्द्वानी: निगम के ड्रोन पर सेना की पाबंदी…
मनीष तिवारी, अमृत विचार। नगर निगम की अधूरी तैयारी लगातार जीआईएस सर्वे का समय बढ़ा रही है। अब ड्रोन के उड़ने से पहले मिलिट्री की ओर से पाबंदी लग गई है। मिलिट्री एरिया के आसपास ड्रोन को सीमित दायरे तक ही उड़ने की अनुमति है। ऐसे में शहर में वह इस ग्राउंड के कैप्चरिंग से …
मनीष तिवारी, अमृत विचार। नगर निगम की अधूरी तैयारी लगातार जीआईएस सर्वे का समय बढ़ा रही है। अब ड्रोन के उड़ने से पहले मिलिट्री की ओर से पाबंदी लग गई है। मिलिट्री एरिया के आसपास ड्रोन को सीमित दायरे तक ही उड़ने की अनुमति है। ऐसे में शहर में वह इस ग्राउंड के कैप्चरिंग से बचने के लिए कहां-कहां उड़ सकता है, इसकी सीमा निर्धारित की जा रही है। पहले से कोई तैयारी न होने के कारण जो सर्वे अब तक पूरा हो जाना चाहिए था, उसे अभी शुरू भी नहीं किया जा सका है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अनुमति मिलने के बाद शहरी विकास निदेशालय द्वारा नगर निगम को जियोग्राफिकल इनफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) के तहत सर्वे करने के निर्देश जारी किए थे। इस सर्वे के लिए नगर निगम को ड्रोन का सहारा लेना था, लेकिन उसके उड़ने से पहले ही फाइलें अधिकारियों के दफ्तरों में ठहरी रहीं। सीओ के बाद डीएम और अब मिलिट्री पाबंदियों के चलते ड्रोन उड़ नहीं पा रहा है। दरअसल ड्रोन को रेड जोन एरिए में नहीं उड़ाया जा सकता है।
इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र हैं, जिन्हें कैमरे में कैद नहीं किया जा सकता है। इनमें सुरक्षा से जुड़े हथियार, व्यायायाम, मीटिंग स्थल आदि हैं। इनके आसपास करीब तीन किमी तक ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता है। शहर में तिकोनिया स्थित मिलिट्री ग्राउंड है, जोकि नगर क्षेत्र में ही आता है। इस ग्राउंड से ड्रोन को कितनी दूरी तक उड़ा सकते हैं, यह स्पष्ट होने के बाद ही निगम ड्रोन को उड़ा सकेगा।
31 अक्तूबर तक पूरा सर्वे होगा चुनौती
शहर के सभी 60 वार्डों का 31 अक्तूबर तक सर्वे करना नगर निगम के लिए चुनौती हो सकता है। इतने ही समय तक के लिए जिला अधिकारी द्वारा अनुमति मिली है। करीब 52 वर्ग किमी क्षेत्रफल में ड्रोन को हर संपत्ति को कैप्चर करना है। जिसके बाद डिजिटल मैप तैयार होगा। फिर सभी संपत्तियां नाम व पते के साथ वेब पोर्टल पर दर्ज होंगी। इसके बाद निगम आपत्तियां सुनेगा, जिनके निस्तारित करने के बाद अंतिम रूप से डाटा पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद कर की गणना, सत्यापन, निगरानी आदि आसान होगी।
मिलिट्री ग्राउंड में आवासीय क्षेत्र है। इसलिए अनुमति मिलने में ज्यादा समय नहीं मिलेगा। यह औपचारिकता जरूरी है, इसलिए आर्मी ऑफिसर्स से बातचीत चल रही है। उनके द्वारा जो दायरा निश्चित किया जाएगा, उसका ख्याल करते हुए ही ड्रोन को शहर में उड़ाया जाएगा। दो से चार दिन के भीतर सर्वे शुरू कर दिया जाएगा।-गौरव भसीन, सहायक नगर आयुक्त
