गजब हाल: पहाड़ के इस अस्पताल में दो साल से बत्ती गुल, पीने के पानी का भी संकट
गरमपानी, अमृत विचार। सरकार व उसके कारिंदे सुदूर गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लाख दावे करें पर धरातल में दावे खोखले साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर गांव में स्थित अस्पताल बिजली और पानी तक के लिए तरस रहा है। राजकीय प्राथमिक चिकित्सालय टाइप ए बांज पाथरी ऐसी ही हकीकत बयां …
गरमपानी, अमृत विचार। सरकार व उसके कारिंदे सुदूर गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लाख दावे करें पर धरातल में दावे खोखले साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर गांव में स्थित अस्पताल बिजली और पानी तक के लिए तरस रहा है। राजकीय प्राथमिक चिकित्सालय टाइप ए बांज पाथरी ऐसी ही हकीकत बयां कर रहा है।

रामगढ़ ब्लॉक के बांज पाथरी गांव में स्थित प्राथमिक चिकित्सालय तमाम गांवों के लिए संजीवनी है। आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग यहां उपचार को पहुंचते हैं पर अस्पताल में हालात एकदम उलट हैं। पिछले दो वर्षों से बिजली और पानी भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अस्पताल में पहुंचने वाले मरीज तथा तीमारदार परेशान हो जाते हैं। अस्पताल स्टाफ को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

आरोप है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का भी लाभ नहीं मिल रहा जबकि अस्पताल तमाम गांवों के मध्य में स्थित है। मजबूरी में ग्रामीणों को दूरदराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है। जिसमें समय के साथ पैसे की भी बर्बादी होती है। मदन सुयाल, कुबेर सिंह, महेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, ध्यान सिंह, राजेंद्र सिंह, मनीष कर्नाटक आदि ने अस्पताल में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग उठाई है।
