सीतापुर: सरकारी जिम्मेदारों ने छीन लिया गरीब बच्चों का निवाला, जानें मामला

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सीतापुर। सकरन ब्लाक क्षेत्र में सरकार द्वारा सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को दिए जाने वाले राशन में घोटालेबाजी का मामला प्रकाश में आ रहा है। बच्चे कोटेदारों के पास, तो कोटेदार सरकारी गल्ला गोदामों से राशन पाने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन दो साल के भीतर करीब नौ माह का यह लगभग …

सीतापुर। सकरन ब्लाक क्षेत्र में सरकार द्वारा सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को दिए जाने वाले राशन में घोटालेबाजी का मामला प्रकाश में आ रहा है। बच्चे कोटेदारों के पास, तो कोटेदार सरकारी गल्ला गोदामों से राशन पाने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन दो साल के भीतर करीब नौ माह का यह लगभग एक हजार कुंतल राशन गायब बर दिया गया। बच्चों के लिए सरकार से मिलने वाला राशन 93 कोटेदारों को नहीं मिला है।

सूत्रों का दावा है कि यह राशन सरकारी गोदामों से नहीं दिया गया है। जिसकी वजह से कोटेदार बच्चों में यह राशन नहीं बांट पाए हैं। हालांकि गोदाम प्रभारी का दावा है कि किसी भी कोटेदार का एमडीएम का अवशेष राशन गोदाम पर नही है, जो भी राशन आता है, उसे कोटेदारों को दे दिया जाता है। विकास खंड सकरन के सांडा स्थित आईएफएससी के गल्ला गोदाम से इलाके के 93 कोटेदार राशन का उठान करते हैं।

वर्ष 2020-21 का करीब एक हजार कुंतल एमडीएम का अवशेष राशन किसी भी कोटेदार को गोदाम से नहीं दिया गया। जबकि क्षेत्र के विद्यालयों में पढने वाले छात्र- छात्रायें राशन लेने के लिये संबंधित कोटेदारों की गणेश परिक्रमा कर रहे हैं। स्कूली बच्चों से कोटेदारों द्वारा यह कहकर मामले को टाल दिया जाता है कि उन्हें अवशेष एमडीएम का राशन गोदाम से नहीं मिला है। गोदाम से राशन मिलने पर आप लोगों को वितरित कर दिया जायेगा।

क्षेत्र के अधिकतर कोटेदारों द्वारा नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया गया कि एमडीएम के अवशेष करीब एक हजार कुंतल राशन को जिम्मेदार लोगों ने कोटेदारों को न देकर गोदाम से ही उसे बेंच दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2020 में अप्रैल से सितम्बर तक छह माह व वर्ष 2021 में अप्रैल से जून तक तीन माह का एमडीएम का अवशेष राशन किसी भी कोटेदार को गोदाम से नहीं दिया गया। शायद यही वजह है कि अपना हक लेने के लिये बच्चें उनकी दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं।

कोटेदारों ने बताया कि अवशेष एमडीएम को लेकर न तो पूर्ति निरीक्षक कुछ बता रहे है और न ही गोदाम प्रभारी बता रही है कि आखिर भारी मात्रा में गायब यह राशन गया कहा? एक ओर सरकार सर्व शिक्षा अभियान को बढ़ावा देने देने के लिये मुफ्त शिक्षा, किताबें, ड्रेस व एमडीएम जैसी महत्व पूर्ण योजनायें चला रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारों द्वारा सरकारी स्कूलों में शिक्षा गृहण कर रहे बच्चों के निवाले पर डाका डाला जा रहा है। मामले को लेकर जब गोदाम प्रभारी अनामिका सिंह से बात की गयी तो उन्होने बताया कि किसी भी कोटेदार का एमडीएम का अवशेष राशन गोदाम पर नही है, जो भी राशन आता है, उसे कोटेदारों को आवंटित कर दिया जाता है।

तो कोटेदारों को ही कम मिलता है राशन

सकरन के सांडा में स्थित आईएफएससी के गल्ला गोदाम पर कोटेदारों का शोषण किया जा रहा है। यहां पर कोटेदारों को 50 किलो की गेंहू, चावल की बोरी 55 किलो पर दी जाती है। गल्ले की बोरी को गोदाम में लगे कांटे पर न तौलवाकर पड़ोस में लगे धर्मकांटे पर तौलाया जाता है। राशन की लोंडिग व उतराई एवं धर्मकांटे की तौल का पैसा कोटेदारों से लिया जाता है। कोटेदारों द्वारा बताया गया कि 55 किलो वाली बोरी 48-49 किलो निकलती है। जिससे प्रति माह करीब आठ से दस कुंतल राशन हर कोटेदार का कम पड़ता है। इसी वजह से पांच किलो यूनिट पर कोटेदारों द्वारा चार किलो राशन दिया जाता है।

कोविड काल से बच्चों को मिलता है राशन

जानकार बताते हैं कि कोरोना काल में जब स्कूल बंद थे, तब स्कूलों में भोजन नहीं मिलता था। एमडीएम का राशन बच्चों को कोटेदार द्वारा वितरित किया जाता था। वर्ष 2020 में प्रति बच्चा एक किलो 630 ग्राम गेहूं व 3 किलो 270 ग्राम चावल कुल चार किलो 900 ग्राम, वर्ष 2021 में प्रति बच्चा 4 किलो 600 ग्राम गेहूं व नौ किलो 200 ग्राम चावल कुल 13 किलो आठ सौ ग्राम प्रति माह से मिलता था। शिक्षा विभाग द्वारा जारी लिस्ट पर गौर करें तो कोटेदार का अप्रैल 2020 से सितम्बर 2020 तक छ: माह व अप्रैल 2021 से जून 2021 तक तीन माह का अवशेष एमडीएम गोदाम से नहीं मिला है।

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