हल्द्वानी: जंगल से होता हुआ शहर में आएगा जमरानी का पानी
हल्द्वानी, अमृत विचार। प्रस्तावित जमरानी बांध का पानी जंगल से होता हुआ शहर में आएगा। पेयजल लाइन बिछाने व ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 16 हेक्टेयर वन भूमि की दरकार होगी। 17 किमी लंबी पाइप लाइन से पानी हल्द्वानी पहुंचेगा। कार्यदायी संस्था जल निगम 400 करोड़ की इस योजना पर काम कर रहा है। जमरानी बांध …
हल्द्वानी, अमृत विचार। प्रस्तावित जमरानी बांध का पानी जंगल से होता हुआ शहर में आएगा। पेयजल लाइन बिछाने व ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 16 हेक्टेयर वन भूमि की दरकार होगी। 17 किमी लंबी पाइप लाइन से पानी हल्द्वानी पहुंचेगा। कार्यदायी संस्था जल निगम 400 करोड़ की इस योजना पर काम कर रहा है।
जमरानी बांध से पानी हल्द्वानी पहुंचाने का जिम्मा जल निगम को दिया गया है। जल निगम ने योजना से पहले जमरानी बांध से प्रस्तावित पेयजल लाइन का सर्वे किया है। इस सर्वे के अनुसार पेयजल लाइन और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 16 हेक्टेयर वन भूमि की जरुरत पड़ेगी।
पेयजल लाइन वन भूमि के साथ ही निजी भूमि से भी गुजरेगी। इस लाइन को बिछाने में छह हेक्टेयर वनभूमि की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा दमुवाढूंगा में बनने वाले ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए दस हेक्टेयर वनभूमि की जरुरत है। इसके लिए कार्यदायी संस्था शासन से सर्वे रिपोर्ट मंजूर होने के बाद आवेदन करेगी।
सिंचाई विभाग को भी वनभूमि की जरुरत
हल्द्वानी। प्रस्तावित जमरानी बांध निर्माण के लिए सिंचाई विभाग को भी वनभूमि की जरुरत पड़ेगी। सिंचाई विभाग बांध के आसपास निर्माण कार्य कराएगा। यह इलाका वनभूमि में आता है। इसके लिए विभाग अलग से वन विभाग को भूमि उपलब्ध कराने के लिए आवेदन करेगा।
जल निगम को मिल सकता है वितरण का भी काम
हल्द्वानी। जमरानी बांध से पानी लाकर वितरण प्रणाली तैयार करने का काम भी जल निगम को सौंपा जा सकता है। जमरानी बांध परियोजना के तहत बांध निर्माण के साथ ही पानी के वितरण का काम भी होना है। जल निगम ने बांध से पानी फिल्टर प्लांट और फिर ओवरहेड टैंकों तक पहुंचाने का प्लान तैयार किया है। जमरानी बांध परियोजना के लिए फंडिंग करने वाली संस्था एडीबी पानी के वितरण का एक पूरा प्लान चाहती है। इसमें बांध से पानी लाने और वितरण के लिए अलग-अलग बजट जारी करने के बजाए एक ही बजट पर काम चाहती है।
शासन से सर्वे रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद वन विभाग में भूमि के लिए आवेदन किया जाएगा। वन विभाग की मंजूरी के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। वितरण व्यवस्था के संबंध में मुख्यालय की मंजूरी का इंतजार है।
एके कटारिया, अधिशासी अभियंता, जल निगम
