हल्द्वानी: आईआईटी रुड़की की टीम करेगी गौला नदी में नुकसान का आकलन

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हल्द्वानी, अमृत विचार। जनपद में बीती 17-19 अक्टूबर तक आई जलप्रलय ने गौला नदी में जमकर तबाही मचाई। गौला नदी में खनन के लिए बनाए गए सीमांकन पिलर, तटबंध बह गए। इधर, वन विभाग ने नदी को चैनलाइज करने के लिए आईआईटी रुड़की से इसका सर्वे कराने का फैसला किया है। इस बाबत आईआईटी रुड़की …

हल्द्वानी, अमृत विचार। जनपद में बीती 17-19 अक्टूबर तक आई जलप्रलय ने गौला नदी में जमकर तबाही मचाई। गौला नदी में खनन के लिए बनाए गए सीमांकन पिलर, तटबंध बह गए।

इधर, वन विभाग ने नदी को चैनलाइज करने के लिए आईआईटी रुड़की से इसका सर्वे कराने का फैसला किया है। इस बाबत आईआईटी रुड़की को पत्र लिखा जा रहा है। उम्मीद है कि नंवबर में सर्वे शुरू हो जाएगा।

वन विभाग के अनुसार, नदी के दोनों किनारों से 25-25 फीसदी इलाके पर सीमांकन पिलर लगाए जाते हैं जबकि बीच के 50 फीसदी हिस्से में खनन होता है। नदी किनारे बसे गांवों और भूकटाव को रोकने के लिए तटबंध बनाए जाते हैं। जो पानी की रफ्तार को कम करते हैं। इधर, पिछले हफ्ते आई जल प्रलय में गौला नदी को नुकसान हुआ है। खनन निकासी के लिए नदी में बनीं सड़कें बह गईं।

वहीं 250 से ज्यादा सीमांकन पिलर और तटबंध भी बह गए। इससे वन विभाग को लाखों का नुकसान हुआ है हालांकि सटीक आकलन सर्वे के बाद ही पता चल पाएगा। इधर, वन विभाग ने नदी में तटबंध बनाने, सीमांकन पिलर के लिए आईआईटी रुड़की से सर्वे कराने का फैसला किया है।

इसमें नदी में कितनी दूरी पर तटबंध हो, नदी के भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तटबंध का डिजाईन वगैरह का सर्वे कराया जाएगा। फिर इस सर्वे के आधार पर तटबंध बनाए जाएंगे ताकि फिर से जल प्रलय जैसे हालात होने पर ऐसा नुकसान नहीं हो। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ को पत्र लिखा जा रहा है। नवंबर में सर्वे शुरू होने की उम्मीद है।

गौला नदी में तटबंध वगैरह बनाने के लिए आईआईटी रुड़की से सर्वे कराया जाएगा। इस बाबत पत्र लिखा जा रहा है। पिछले दिनों आई जल प्रलय से गौला नदी में सीमांकन पिलर, तटबंध, सड़कों वगैरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।= संदीप कुमार, डीएफओ तराई पूर्वी वन डिवीजन, हल्द्वानी

गौला नदी में सीमांकन पिलर बनाना शुरू
राज्य में खनन सत्र शुरू हो गया है लेकिन नदियों में पानी की वजह से खनन शुरू नहीं हो सका है। गौला नदी में भी खनन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वन विभाग ने गौला नदी में सीमांकन पिलर बनाने शुरू कर दिए हैं। वहीं उपखनिज निकासी गेटों से नदी में आवाजाही के लिए सड़कें बनाई जा रही हैं।

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