हल्द्वानी: इस बार दिवाली पर चाइना नहीं करेगा शोर, भारतीय पटाखों की रहेगी गूंज

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हल्द्वानी, अमृत विचार। इस बार दिवाली में चाइना पटाखों का शोर नहीं भारतीय पटाखों की गूंज सुनाई देगी। प्रतिबंधित होने की वजह से व्यापारियों ने उसकी खरीद नहीं की, जिनके पास पुराना स्टॉक है भी तो वह उसे खुलकर नहीं बेच पाएंगे। इसके साथ ही भारत में बने पटाखों में क्लासिक बम व लड़ी भी …

हल्द्वानी, अमृत विचार। इस बार दिवाली में चाइना पटाखों का शोर नहीं भारतीय पटाखों की गूंज सुनाई देगी। प्रतिबंधित होने की वजह से व्यापारियों ने उसकी खरीद नहीं की, जिनके पास पुराना स्टॉक है भी तो वह उसे खुलकर नहीं बेच पाएंगे। इसके साथ ही भारत में बने पटाखों में क्लासिक बम व लड़ी भी ढूंढ पाना मुश्किल होगा। हालांकि हेल्दी पटाखों की विविधता देखने को मिलेगी।

पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर मानकों का पालन किये बगैर बनने वाली चीन की आतिशबाजियों पर रोक लगी हुई है। पटाखों के बाजारों में भी अत्यधिक साउंड वाली आतिशबाजियां न के बराबर ही दिख रहीं हैं। न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन भी व्यापारियों पर सख्ती कर चुका है। हर दिवाली में महंगा होने के बावजूद अपनी अत्यधिक आवाज से पसंद किया जाने वाला कॉक क्लासिक बम और 15 मिनट से ज्यादा समय तक लगातार पटाखा साउंड करने वाली कॉक लड़ी प्रतिबंधित होने की वजह बाजार में नहीं दिखेगी। भारत में निर्मित कम साउंड और धुआं छोड़ने वाले पटाखों को ही बेचने की अनुमति है।

व्यापारियों ने सबसे ज्यादा पटाखों की खरीदारी साउथ के सेवा काशी, यूपी के मैनपुरी, गुजरात, दिल्ली आदि से की है। इसमें बच्चों के लिए बटरफ्लाई, सांप, मगरमच्छ सहित विभिन्न प्रकार के कम प्रदूषण व आवाज करने वाले पटाखे हैं।

पटाखों पर 15 फीसदी महंगाई का असर
महंगाई की मार इस बार आतिशबाजियों पर भी दिखेगी। 15 फीसदी तक पटाखे महंगे हुए हैं। व्यापारी विवेक कश्यप ने बताया कि पिछले साल से इस बार पटाखे महंगे हैं। इसलिए गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए ही पटाखों की खरीदारी की है।

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