हल्द्वानी: बेस अस्पताल के पर्चे में प्राइवेट मेडिकल स्टोर से मंगाई जा रहीं दवाएं, हो रहा कोड का इस्तेमाल

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर को बाहर से दवाएं लिखने की मनाही है, लेकिन बेस अस्पताल के कुछ डॉक्टर खुलेआम सरकारी पर्चे पर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। दवाएं लिखते समय इस तरह की लिखावट का इस्तेमाल किया जा रहा है कि उसे और कोई नहीं पढ़ सकता है, केवल चुनिंदा मेडिकल …

हल्द्वानी, अमृत विचार। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर को बाहर से दवाएं लिखने की मनाही है, लेकिन बेस अस्पताल के कुछ डॉक्टर खुलेआम सरकारी पर्चे पर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। दवाएं लिखते समय इस तरह की लिखावट का इस्तेमाल किया जा रहा है कि उसे और कोई नहीं पढ़ सकता है, केवल चुनिंदा मेडिकल स्टोर स्वामियों के ही समझ में यह लिखावट आ सकती है।

बेस अस्पताल के डॉक्टर द्वारा कोड भाषा में लिखी गईं दवाएं।

बेस अस्पताल की ओपीडी में रोजाना चार से पांच सौ मरीज आते हैं। 28 रुपए के पर्चे में मरीजों को 15 दिन के लिए डॉक्टरों का परामर्श मिलता है और साथ ही दवाएं भी अस्पताल से ही दी जाती है। सरकारी डॉक्टरों को बाहर की दवाएं लिखने की मनाही है। बावजूद इसके बेस अस्पताल के कुछ डॉक्टर सरकारी पर्चे पर खुलेआम बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।

मरीजों के साथ दिक्कत यह है कि वह अपनी पहचान के मेडिकल स्टोर स्वामी के पास से दवा नहीं ले सकता है। साथ ही उस दवा का जेनरिक सॉल्ट भी उसके लिए खरीदने मुश्किल है जोकि कम दामों में मिलता है।

इसका कारण यह है कि बाहर से जो दवाएं लिखी जा रहीं हैं उसकी लिखावट ऐसी है कि उसे हर कोई नहीं पढ़ सकता है। उसे केवल चुनिंदा मेडिकल स्टोर स्वामी ही पढ़ सकते हैं और दवा दे सकते हैं। यहां तक की अन्य और कोई डॉक्टर भी उस भाषा को नहीं पढ़ पा रहा है। बाकी का अन्य कोई मेडिकल स्टोर स्वामी उस दवा को नहीं दे सकता है। इस तरह से सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की जेब को काटा जा रहा है।

मैंने आदेश जारी कर रखे हैं कि कोई भी डॉक्टर बाहर से दवाएं नहीं लिखेंगे। मैं यह मामला देखूंगा। – डॉ. हरीश लाल, पीएमएस, बेस अस्पताल

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