नैनीताल: प्राचीन ज्ञान और समकालीन ब्रह्मांड विषय पर संगोष्ठी का समापन, कुलपति ने युवाओं के नाम दिया संदेश

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नैनीताल, अमृत विचार। कुमाऊं विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग और भारतीय अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सोमवार को समापन हो गया। विवेकानंद भवन, हरमिटेज में समापन सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि एपीसीसीएफ उत्तराखंड सरकार डॉ. कपिल जोशी, कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रो. एनके जोशी, संयोजक प्रो. नीता बोरा शर्मा …

नैनीताल, अमृत विचार। कुमाऊं विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग और भारतीय अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सोमवार को समापन हो गया।

विवेकानंद भवन, हरमिटेज में समापन सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि एपीसीसीएफ उत्तराखंड सरकार डॉ. कपिल जोशी, कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रो. एनके जोशी, संयोजक प्रो. नीता बोरा शर्मा व आयोजक सचिव हरीश सिंह राणा ने दीप जलाकर किया। प्राचीन ज्ञान एवं समकालीन ब्रह्मांड: स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विशेष संदर्भ में विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया था।

संगोष्ठी को संबोधित करते कुलपति प्रो. एनके जोशी।

कुलपति प्रो एनके जोशी ने कहा कि प्राचीन भारत का ज्ञान साहित्य अत्यन्त विपुल एवं विविधता सम्पन्न है। इसमें धर्म, दर्शन, भाषा, शिक्षा आदि के अतिरिक्त गणित, ज्योतिष, सैन्य विज्ञान, आयुर्वेद, रसायन, धातुकर्म, आदि भी विषय रहे हैं। भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की विकास-यात्रा प्रागैतिहासिक काल से आरम्भ होती है। भारत का अतीत ज्ञान से परिपूर्ण था और भारतीय सम्पूर्ण संसार का नेतृत्व करते थे। प्राचीन समय में न आफसेट प्रिंटिंग की मशीने थीं, न स्क्रिन प्रिटिंग की मशीनें। न ही इंटरनेट था जहां किसी भी विषय पर असंख्य सूचनाएं उपलब्ध होती हैं। फिर भी प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों ने अपने पुरुषार्थ, ज्ञान और शोध की मदद से कई शास्त्रों की रचना की और उसे विकसित भी किया।

उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाएं जो भारतीय धरोहर से हमारा परिचय करवा सके। विज्ञान, संस्कृति, सभ्यता, कला, विभिन्न प्राचीन शिक्षाएं, इतिहास आदि हमारी गौरवशाली परम्पराओं एवं धरोहर का अहम भाग रहे हैं और हमारी युवा पीढ़ी को इन परम्पराओं की जानकारी होनी चाहिए तथा उन्हें इनका सम्मान करना चाहिए।

संगोष्ठी का संचालन सहायक निदेशक एचआरडीसी डॉ. रितेश शाह ने किया। कार्यक्रम में डॉ. हृदेश शर्मा, डॉ. भूमिका प्रसाद, डॉ. रुचि मित्तल, डॉ. मंजू चंद्रा, डॉ. दीपा मेहरा, डॉ. गौरव कुमार, मुकेश रावत, अविनाश जाटव, गोपाल सिजवाली, तरुण राज, हिमांशु कुमार, कंचन आदि रहे।

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