उत्तराखंड: दिवाली ही नहीं हर दिन सांस लेना हुआ मुश्किल, आंकड़े चौकाने वाले
नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हवा पूरी तरह से खराब हो चुकी है। अपनी साफ आबोहवा के लिए पहचान रखने वाले राज्य के लिए यह बुरी खबर है। यहां पूरे साल के औसतन सूचकांक में यह आंकड़ा सामने आया है। राजधानी देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, ऋषिकेश, काशीपुर और रुद्रपुर में साल 2020 …
नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हवा पूरी तरह से खराब हो चुकी है। अपनी साफ आबोहवा के लिए पहचान रखने वाले राज्य के लिए यह बुरी खबर है। यहां पूरे साल के औसतन सूचकांक में यह आंकड़ा सामने आया है।
राजधानी देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, ऋषिकेश, काशीपुर और रुद्रपुर में साल 2020 में वायु प्रदूषण के लिए कारक पीएम 2.5 और पीएम 10 मानकों से कहीं ज्यादा पाया गया है। ऐसा नहीं है कि केवल दिवाली के दिन ही इन शहरों की हवा खराब हो रही है। इन शहरों में हर दिन सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। जबकि साल 2020 में कोविड के दौरान हवा की गुणवत्ता काफी साफ हो गई थी लेकिन पूरे साल के प्रदूषण सूचकांक डराने वाले रहे हैं। केवल दिवाली ही नहीं बल्कि किसी अन्य सामान्य दिन भी यहां लोगों को साफ हवा मिलनी मुश्किल हो गई है।
क्या होता है पीएम 10 और पीएम 2.5
पीएम 10 कणों को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर भी कहते हैं। ये धूल के कणों के आकार तक के होते हैं। फैक्ट्रियों, सड़कों या अन्य निर्माण कार्यों के समय ऐसे कण बड़ी मात्रा में निकलते हैं। दूसरी ओर पीएम 2.5 सबसे छोटे वायु कणों में से होते हैं और इनका आकार करीब 2.5 माइक्रोमीटर होता है। अति सूक्ष्म कण होने की वजह से ये आसानी से हमारे लिवर, फेफड़े आदि को प्रभावित कर सकते हैं।
साल 2020 में पीएम 10 और पीएम 2.5 की औसत मात्रा
शहर पीएम 10 पीएम 2.5
देहरादून 133.64 78.25
ऋषिकेश 104.56 18.30
हल्द्वानी 106.49 172.30
काशीपुर 116.94 194.31
रुद्रपुर 114.42 194.64
(-हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा क्रमश: 100 और 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होनी चाहिए।)
पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने से हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इससे गंभीर बीमारियों भी होती हैं।- आरके चतुर्वेदी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
