हल्द्वानी: सीसीटीवी की निगरानी में चल रहा जरायम का खेल
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। जुए के शौकीनों की राजपुरा सबसे मुफीद अड्डा बन चुका है। यहां एक सफेदपोश खादी की आड़ में फड़ सजाता है और हर रोज इस फड़ पर लाखों के वारे-न्यारे होते हैं। ये बड़ी फड़ सीसीटीवी की निगरानी में होती है। सीसीटीवी हर गतिविधि पर नजर रखता है और पूरे इलाके में …
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। जुए के शौकीनों की राजपुरा सबसे मुफीद अड्डा बन चुका है। यहां एक सफेदपोश खादी की आड़ में फड़ सजाता है और हर रोज इस फड़ पर लाखों के वारे-न्यारे होते हैं। ये बड़ी फड़ सीसीटीवी की निगरानी में होती है। सीसीटीवी हर गतिविधि पर नजर रखता है और पूरे इलाके में फैले गुर्गे फड़ की ओर जाने वाले हर किसी की हरकत पर नजर रखते हैं।
राजपुरा में अगर अपने वाहन से दाखिल होना है तो सिर्फ दो रास्ते हैं। एरोड्रम रोड क्रासिंग से और दूसरी स्टेशन रोड पर राजपुरा क्रासिंग है। इसके अलावा पैदल आने-जाने के लिए राजपुरा चारों ओर से खुला है। घनी आबादी वाली इसी बस्ती के बीच एक सफेदपोश का फड़ सजता है। ये फड़ सीसीटीवी की निगरानी में सजती है।
सीसीटीवी फड़ के बाहर भी लगाए गए हैं, ताकि अंदर बैठा एक शख्स गली से फड़ की ओर आने-जाने वाले हर व्यक्ति की निगरानी कर सके। इस फड़ पर आने वाले जुआरियों को डर नहीं लगता है और इसकी वजह जुआरियों के सुरक्षा की जिम्मेदारी है। दरअसल, सीसीटीवी से लैस फड़ के साथ सफेदपोश ने जुआरियों को सुरक्षित रखने के लिए अपने गुर्गे रखे हैं।
ये गुर्गे हर उस रास्ते पर मुस्तैद रहते हैं, जो रास्ता फड़ की ओर जाता है। इनका काम सिर्फ इतना है कि ये एक जगह खड़े या टहलते हुए आने-जाने वालों की निगरानी करते हैं। यदि इन्हें कोई भी संदिग्ध (पुलिस) दिखाई देता है तो तुरंत इसकी सूचना फड़ तक पहुंचाई जाती है और पुलिस के पहुंचने से पहले ही फड़ खाली कर दी जाती है। इस सफेदपोश की नकेल कसने के लिए पुलिस ने कई बार प्रयास किए, लेकिन राजपुरा में फैला सफेदपोश का तिलिस्म पुलिस नहीं तोड़ पाई।
मुश्किल ये है कि यहां पुलिस को सब पहचानते हैं
हल्द्वानी। ऐसा नहीं है कि पुलिस ने सफेदपोश के खिलाफ एक्शन नहीं लिया, लेकिन पुलिस अपनी कोशिश को कभी अंजाम तक नहीं पहुंचा सकी और इसकी सबसे बड़ी वजह है पुलिस की पहचान। राजपुरा में सफेदपोश के इस धंधे से जुड़ा हर व्यक्ति पुलिस को नजदीक से पहचानता है और यही वजह से कि पुलिस हर कोशिश विफल होती है।
स्मैक बिक्री का भी सबसे मुफीद अड्डा है राजपुरा
हल्द्वानी। केवल एक जुआ ही नहीं, बल्कि राजपुरा नशे के लिए भी मशहूर है। यहां चरस और स्मैक असानी से उपलब्ध हो जाती है। बंदी के दौरान शराब भी मिल जाती है, बस इसके लिए थोड़ा ज्यादा खर्च करना होता है। राजपुरा के साथ ही बनभूलपुरा, इंद्रानगर और गांधीनगर स्मैक और चरस बिक्री के पुराने गढ़ हैं, जिसे चाह कर भी पुलिस खत्म नहीं कर पाई।
स्मैक के लालच में निगरानी करते हैं गुर्गे
हल्द्वानी। बताया जाता है कि सफेदपोश के गुर्गों की फेहरिस्त में सबसे ज्यादा ऐसे लोग हैं, जो स्मैक, चरस या शराब के लती हैं। फड़ सजने के दौरान रास्तों पर निगरानी करने वाले इन नशेड़ियों को नशे की खुराक के एवज में तैनात किया जाता है। इन्हें नशे की भरपूर डोज के साथ पैसा भी दिया जाता है। जिसकी वजह से ये अपना काम भी इमानदारी से करते हैं।
