हल्द्वानी: अब भूल जाएं छह महीने शहर का विकास
हल्द्वानी, अमृत विचार। आपके घर को जाने वाली गली खराब है, नालियां टूटी हैं, लाइट नहीं लगी। पानी की लाइन या फिर सीवर की लाइन बिछनी है। यदि आप इन समस्याओं के चुनाव से पहले दूर होने की उम्मीद रख रहे हैं तो अगले छह महीने तक इसे भूल जाएं। क्योंकि आचार संहित लगने के …
हल्द्वानी, अमृत विचार। आपके घर को जाने वाली गली खराब है, नालियां टूटी हैं, लाइट नहीं लगी। पानी की लाइन या फिर सीवर की लाइन बिछनी है। यदि आप इन समस्याओं के चुनाव से पहले दूर होने की उम्मीद रख रहे हैं तो अगले छह महीने तक इसे भूल जाएं। क्योंकि आचार संहित लगने के कारण इन कार्यों को लेकर आपको इंतजार करना पड़ सकता है। शहर की सरकार पिछले छह महीने से आपके मुद्दों पर बात करने के लिए बैठी ही नहीं है। अब अगर बोर्ड में प्रस्ताव पास भी हो जाएं तो अगले महीने से आचार संहिता लग जाएगी और काम काज मार्च में ही पटरी पर आ सकेगा।
सारे विकास कार्यों से संबंधित प्रस्ताव नगर निगम की बोर्ड में ही पास होते हैं लेकिन पांच महीने बीत चुके हैं निगम की बोर्ड बैठक ही आयोजित नहीं की गई है। पिछली बैठक 16 जून 2021 को आयोजित की गई थी। इसके बाद से बैठक नहीं हुई। यानी शहर के विकास की चिंता ही नहीं की गई है। अब बोर्ड बैठक की तैयारियां चल रही हैं। संभावना है कि इस माह के अंत में बैठक हो, लेकिन माना जा रहा है कि आचार संहिता से पहले होने वाली बोर्ड की बैठक केवल कागजी होगी।
यहां जो प्रस्ताव पारित होंगे उनकी कागजी कार्यवाही पूरी करने में लंबा वक्त लग सकता है। मध्य दिसंबर के बाद से कभी आचार संहिता लग सकती है। आचार संहिता में न नए काम होंगे और न ही उनसे संबंधित टेंडर ही प्रकाशित हो सकेंगे। इसके चलते विकास के आंकड़े और योजनाओं को दर्ज कर शहर की सरकार भी पल्ला झाड़ती दिखेगी। यह बैठक पहले हो जाती तो पास होने वाले कार्यों को किया जा सकता था, लेकिन जिम्मेदार बैठक न हो पाने का कारण कोरोना मान रहे हैं। यह तब है जब प्रदेश के मुखिया कोरोना काल में ही दो बार कैबिनेट की बैठक कर चुके हैं।
बोर्ड की बैठक को लेकर ये हैं नियम
दरअसल, बोर्ड की बैठक को लेकर नियम हैं कि वित्तीय वर्ष में तीन बैठकें की जानी चाहिए लेकिन इनके बीच छह महीने से ज्यादा का वक्त नहीं होना चाहिये।
विरोध में गूंज सकती है सत्ता पक्ष के पार्षदों की भी आवाज
मेयर से नाराज पार्षद इस मुद्दे के साथ नेता प्रतिपक्ष संग बोर्ड की बैठक में हंगामा करने का मन बना रहे हैं। बोर्ड की बैठक में मनमाने कार्यों को लेकर और काम होने के बाद उसे बोर्ड की बैठक में पास कराने के विरोध में पार्षद बैठक में गुस्सा जाहिर करेंगे। बोर्ड की बैठक में सत्ता पक्ष के भी कई पार्षदों की आवाज गूंज सकती है। नाम न छापने की शर्त पर बीजेपी से जुड़े कुछ पार्षदों ने उपेक्षा का कारण बताते हुए बोर्ड में मेयर के सामने रखने के लिए प्रश्न तैयार किए हैं। सवालों के माध्यम से अपना रोष व्यक्त करेंगे। यही नहीं विरोधी दलों के पार्षद भी कई मुद्दों पर बोर्ड मेयर को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।
बोर्ड की बैठक में गरमाएंगे ये मुद्दे
1- चुनाव को देखते हुए साल का बजट जल्द खत्म करना
2- मनमाने कामों को करने का आरोप लगाकर विरोध
3- नए 27 वार्डों में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति न होना
4- नए वार्डों के लिए आए कूड़ा वाहनों का नहीं पहुंचना
5- नए वार्डों में स्ट्रीट लाइट को लेकर धीमी चाल
शहर के विकास में मिलने वाला बजट
1- केंद्र सरकार साल में केंद्र दो किश्तों में देता है सात करोड़ रुपये
2- राज्य सरकार चार किश्तों में देती है 28 करोड़ रुपये
3- नगर निगम अपने खजाने से खर्च करती है छह करोड़ रुपये
मेयर ने पसंदीदा पार्षदों के वार्डों में काम कराए हैं। बोर्ड की बैठक में उन कार्यों को पास कराया जाना है जो पहले हो चुके हैं। सारा बजट खत्म कर दिया और जनता अभी भी त्रस्त है। बोर्ड की बैठक का विरोध करेंगे।
नरेंद्र जीत सिंह, पार्षद
वार्ड में सड़कों पर गड्ढे हैं। नालियां टूटी हुई हैं। सीवर लाइन बिछी नहीं है। इन सब कार्यों की अनदेखी की गई है। बोर्ड की बैठक में इन मुद्दों के साथ मेयर से सवाल करेंगे, उन्हें इस उपेक्षा का जवाब देना होगा।- राजेंद्र सिंह जीना, पार्षद
स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर पुस्तकालय बनना था। ताज चौराहे पर इसके लिए जमीन भी है। बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव पास भी हो चुका है। उसके बावजूद लगातार उपेक्षा की गई है। बोर्ड की बैठक में जनता से जुड़े सवालों का जवाब मांगा जाएगा।-मोहम्मद गुरफान, पार्षद
आचार संहिता के कारण बैठक में व्यवधान हो सकता था। जनता हित में प्रस्ताव पास किए जा सकें, इसलिए इसी महीने बैठक के लिए तारीख निश्चित कर ली जाएगी। कोरोना काल व अन्य दिक्कतों के कारण बैठक नहीं की जा सकी थी। नियमानुसार इसे आयोजित किया जाएगा। बोर्ड की बैठक में अनुशासन होगा तो जनहित में काम को तेजी मिलेगी।- डॉ. जोगेंद्र रौतेला, मेयर
