हल्द्वानी: कैदी का एक दांत उखाड़ने के लिए सरकार खर्च कर रही 40 हजार
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। प्राइवेट डेंटल क्लीनिक पर एक दांत की आरसीटी कराने में ज्यादा से ज्यादा पांच हजार का खर्च आता है, लेकिन जेल में बंद कैदियों और बंदियों का एक दांत उखाड़ने और उसकी आरसीटी करने के लिए सरकार 40 हजार रुपए तक खर्च कर रही है। खर्च हैरान करने वाला, लेकिन सच है और …
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। प्राइवेट डेंटल क्लीनिक पर एक दांत की आरसीटी कराने में ज्यादा से ज्यादा पांच हजार का खर्च आता है, लेकिन जेल में बंद कैदियों और बंदियों का एक दांत उखाड़ने और उसकी आरसीटी करने के लिए सरकार 40 हजार रुपए तक खर्च कर रही है। खर्च हैरान करने वाला, लेकिन सच है और अब बेजा खर्च को काबू करने की कोशिशें की जा रही हैं।
आरसीटी यानी रूट कैनाल ट्रीटमेंट और इस ट्रीटमेंट की नौबत तब आती है, जब दांतों और उसकी जड़ों में संक्रमण आता है। हल्द्वानी जेल में दांत की समस्या से ग्रस्त करीब 80 कैदी और बंदी हैं। इनमें से सात लोगों को आरसीटी की जरूरत है। यानि पुराना संक्रमित दांत निकाल कर नया दांत लगाना होता है।
इन सात लोगों में तीन को इलाज के लिए सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन यहां से तीनों को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। जिनका फिलहाल वहां इलाज चल रहा है, लेकिन भारी कीमत पर। जबकि अभी चार और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, जब एक कैदी को इलाज के लिए हल्द्वानी से एम्स ऋषिकेश भेजा जाता है तो उसके पीछे एक हेड कॉस्टेबल, दो कॉस्टेबल, एक एंबुलेंस और एक चालक भेजा जाता है। आरसीटी की प्रक्रिया में कम से कम तीन और ज्यादा से ज्यादा छह बार आना-जाना पड़ता है। इतनी बार चक्कर लगाने में वाहन का पेट्रोल, चालक का खर्च और पुलिस कर्मियों का टीए, डीए जोड़ दिया जाए तो करीब 40 हजार रुपये खर्च होते हैं।
2.28 लाख से जेल में बनेगी डेंटल क्लीनिक
हल्द्वानी। जेल अधीक्षक एसके सुखीजा हल्द्वानी जेल में एक डेंटल क्लीनिक बना रहे हैं और वो भी बिना किसी सरकारी मदद के। आने वाले 15 से 20 दिनों में जेल के अंदर ये क्लीनिक शुरू हो जाएगा। इस क्लीनिक में ही अब मरीजों की आरसीटी और इम्लांट किया जाएगा। इसके लिए जेल में डेंटल क्लीनिक का पूरा स्ट्रैक्चर तैयार किया जा रहा है।
क्लीनिक से सरकारी पैसे बचेंगे और समय
हल्द्वानी। जेल अधीक्षक एसके सुखीजा ने बताया कि जब कैदी या बंदी इलाज के लिए बाहर जाता है तो पुलिस साथ में भेजनी पड़ती है और इसकी थोड़ी दिक्कत आती है। क्लीनिक तैयार हो जाने पर न तो पुलिस की जरूरत होगी और न ही एम्स जाने की। इससे सरकारी धन और समय तो बचेगा ही, साथ ही कैदियों को तुरंत इलाज भी मिलेगा।
अब एसटीएच से रेफर नहीं किए जाएंगे बंदी
इस मामले में जब राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य डॉ.अरुण जोशी ने बताया कि आरसीटी न करने की शिकायत मिली थी, जिस पर एसटीएच के डेंटल स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है और अब किसी भी कैदी या बंदी को आरसीटी के लिए सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय से रेफर नहीं किया जाएगा।
