हल्द्वानी: मिट्टी में मिल जाएगी सवा सौ साल पुरानी ‘गुलामी की इमारत’
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। गुलामी के दिनों की गवाह रही हल्द्वानी जेल की ऐतिहासिक इमारत को अब सवा सौ साल बाद जमीदोंज कर दिया जाएगा। पूरी तरह जर्जर हो चुकी इस इमारत को एक अर्से से इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा था। हल्द्वानी जेल का निर्माण वर्ष 1903 में अंग्रेजों ने कराया था। उस वक्त …
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। गुलामी के दिनों की गवाह रही हल्द्वानी जेल की ऐतिहासिक इमारत को अब सवा सौ साल बाद जमीदोंज कर दिया जाएगा। पूरी तरह जर्जर हो चुकी इस इमारत को एक अर्से से इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा था।
हल्द्वानी जेल का निर्माण वर्ष 1903 में अंग्रेजों ने कराया था। उस वक्त देश गुलाम था और नैनीताल पर भी अंग्रेजों का शासन था। उस वक्त आजादी के लिए आवाज उठाने वालों के साथ अपराधियों की तरह सुलूक किया जाता था। नैनीताल का फांसी गधेरा भी अंग्रेजों की इसी हैवानियत की बानगी है, जहां हल्द्वानी पर हमला करने के आरोप में रोहिलखंड के विद्रोहियों को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया था। उस समय जेल न होने की वजह से रोहिलखंड के विद्रोहियों को नैनीताल के इसी गधेरे में फांसी दी गई।
ये किस्सा 1858 के आसपास का है। इसके बाद विरोध करने वालों के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने जेल बनाने का फैसला लिया और 1903 में हल्द्वानी में अंग्रेजों ने जेल का निर्माण कराया, जो अब जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। हालांकि वर्ष 1991 तक इसका इस्तेमाल किया गया और इसी वर्ष नई जेल इमारत बन जाने के बाद बंदियों को नई जेल में शिफ्ट कर दिया गया। अब नई इमारत में 17 सौ से ज्यादा बंदी हैं। हालांकि यह संख्या जेल की क्षमता से तीन गुना से भी अधिक हैं। नई इमारत के साथ खड़ी पुरानी इमारत को अब गिराने की इजाजत मिल चुकी है। 15 दिन के भीतर गुलामी की गवाह रही इस इमारत को गिरा दिया जाएगा।
अंग्रेजों द्वारा बनवाई गई जेल की इमारात जर्जर हो चुकी है। इसे गिराने के लिए पीडब्ल्यूडी से सर्वे कराया गया और रिपोर्ट आईजी जेल को भेजी गई थी। जेल को गिराने की अनुमति मिल चुकी है। संभवत: 15 दिन के भीतर इसे गिरा दिया जाएगा। इस स्थान पर मुलाकात भवन व सिलाई केंद्र का निर्माण कराया जाएगा।- एसके सुखीजा, जेल अधीक्षक उप कारागार, हल्द्वानी
तिहाड़ की तर्ज पर बनेगा मुलाकात भवन और सिलाई प्रशिक्षण केंद्र
जहां पर अंग्रेजों द्वारा बनवाई जेल है वहां अब बंदियों से मिलने के लिए मुलाकात भवन व महिला बंदियों के लिए सिलाई प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। इसकी भी अनुमति मिल चुकी है। मुलाकात भवन तिहाड़ जेल की तर्ज पर बनाया जाएगा। इसमें कांच के बॉक्स होंगे और बात करने के लिए इंटरकॉम की व्यवस्था होगी। यानी बंदी और उसके मुलाकाती के बीच एक कांच की मोटी दीवार होगी और बात करने के लिए एक टेलीफोन की व्यवस्था होगी। मुलाकात के लिए केवल 20 मिनट का वक्त दिया जाएगा। इसके बाद इंटरकॉम से संपर्क खुदबखुद कट जाएगा।
सहेजा गया शस्त्रागार
जेल के निर्माण के ठीक एक साल बाद वर्ष 1804 में अंग्रेजों ने एक शस्त्रागार का निर्माण कराया था। इस शस्त्रागार में जेल में तैनात सिपाहियों और अकस्मात स्थिति के लिए हथियार रखे जाते थे। जेल प्रशासन ने फैसला लिया है कि इस शस्त्रागार को निशानी के तौर पर सहेज कर रखा जाएगा। इसके लिए शस्त्रागार को दुरुस्त कर रंग-रोगन कर दोबारा नया कर दिया गया है।
