बरेली: नगर निगम की क्लीन चिट, अब शासन के पाले में गेंद
बरेली, अमृत विचार। जलकल विभाग में एक करोड़ के कबाड़ को 32 लाख रुपये में नीलाम करने की शिकायत के बाद इस प्रकरण में शामिल अफसर बचाव में जुटे हैं। नगर निगम प्रशासन ने मामले में कुछ भी असंवैधानिक न होने की बात कह क्लीन चिट दे दी है। इस मामले का पर्दाफाश कार्यकारिणी समिति …
बरेली, अमृत विचार। जलकल विभाग में एक करोड़ के कबाड़ को 32 लाख रुपये में नीलाम करने की शिकायत के बाद इस प्रकरण में शामिल अफसर बचाव में जुटे हैं। नगर निगम प्रशासन ने मामले में कुछ भी असंवैधानिक न होने की बात कह क्लीन चिट दे दी है। इस मामले का पर्दाफाश कार्यकारिणी समिति के पार्षदों ने किया था। उन्होंने इस प्रकरण को शासन में भी पहुंचा दिया है। इसलिए अब इस मामले की जांच और कार्रवाई दोनों ही अब दोनों ही शासन के पाले में पहुंच चुकी है।
करीब 20 वर्षों से जलकल विभाग का काफी कबाड़ स्टोर में रखा था। कुछ समय पहले विभागीय अधिकारियों ने इस कबाड़ को गाजियाबाद की एक फर्म के हाथों 32 लाख रुपये में नीलाम कर दिया। इसके बाद से ही कार्यकारिणी के तमाम पार्षद इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोले हुए हैं। उनका कहना है कि यह कबाड़ करीब एक करोड़ रुपये का था लेकिन नगर निगम की कार्यकारिणी में स्वीकृति लिए बगैर ही इसकी नीलामी औने-पौने दामों में कर दी गई। पार्षदों ने मंगलवार को मेयर डॉ. उमेश गौतम के साथ मीटिंग के दौरान भी इस मामले को खूब उछाला था।
मेयर ने नगर आयुक्त अभिषेक आनंद से कबाड़ को उठाने पर रोक लगाते हुए मामले की रिपोर्ट मांगी थी। जबकि नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में जलकल विभाग को क्लीन चिट दे दी है। नगर आयुक्त का कहना है कि कबाड़ की बिक्री में सार्वजनिक सूचना के बाद टेंडर कराए गए हैं। कबाड़ का मूल्यांकन करने वाली दिल्ली की संस्था भी अधिकृत है। उधर शिकायतकर्ता कार्यकारिणी के पार्षदों की आपत्ति है कि इस प्रक्रिया को गुपचुप कराया गया। न तो कार्यकारिणी से अनुमति ली गई और न ही पार्षदों को शामिल किया गया।
पहली बार में ही टेंडर में शामिल दो फर्मों के बीच में गाजियाबाद की एक फर्म को ठेका दे दिया गया। जबकि कम से कम तीन फर्म शामिल होनी थी। इसी तरह के कई और गंभीर आरोप लगाते हुए शासन में भी शिकायत की थी। इस गंभीर प्रकरण में नगर निगम प्रशासन ने तो क्लीन चिट दे दी है लेकिन यह मामला शासन में भी है, इसलिए जांच और कार्रवाई की गेंद अब शासन के पाले में है।
गड़बड़ी को लेकर पहले भी सुर्खियों में रह चुका जलकल विभाग
अभी कुछ दिन पहले सीवर की मरम्मत के नाम पर ठेकेदारों व जलकल के स्टाफ के भवन स्वामियों से वसूली करने का मामला भी उजागर हुआ था। पार्षद राजेश अग्रवाल ने इन मामलों को लेकर कई ऑडियो भी वायरल किए थे। इसके बाद इस गड़बड़ी को लेकर जलकल विभाग चर्चा में आ गया था। इससे महकमा को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी। अब कबाड़ बिक्री को सस्ते में बेचने का मामला फिर से उजागर हुआ है। हालांकि अफसर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बजाय उसे दबाने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
जलकल विभाग में कबाड़ की नीलामी की प्रकिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार कार्रवाई के बाद ही कबाड़ को बेचा गया है। जहां तक शासन से स्वीकृति लेने की बात है तो सरकारी जमीन के मामलों में ऐसी मंजूरी की जरूरत पड़ती है। -अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त
