बरेली: ईसाई समाज के लोग कब्र खोदकर शव दफनाने को मजबूर
बरेली, अमृत विचार। शहर में ईसाइयों के कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बची है। मजबूरी में शवों को पुरानी कब्रों को खोदकर दफनाया जा रहा है। शवों को दफनाने के लिए ईसाई समाज नए कब्रिस्तान की मांग कर रहा है। पिछले सालों में ईसाइयों की आबादी तेजी से बढ़ी है, लेकिन कोई …
बरेली, अमृत विचार। शहर में ईसाइयों के कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बची है। मजबूरी में शवों को पुरानी कब्रों को खोदकर दफनाया जा रहा है। शवों को दफनाने के लिए ईसाई समाज नए कब्रिस्तान की मांग कर रहा है। पिछले सालों में ईसाइयों की आबादी तेजी से बढ़ी है, लेकिन कोई नया कब्रिस्तान नहीं बना है। इसलिए जिला प्रशासन से नये कब्रिस्तान के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद जिला कल्याण अधिकारी ने उपजिलाधिकारी से जमीन मुहैया कराने की मांग की है।
शहर में ईसाई समाज के दो ही कब्रिस्तान हैं। जोकि कई सालों पहले ही भर चुके हैं। संयुक्त ईसाई महासंगठन ने बताया कि शहर में ईसाई समाज के लोगों की संख्या मौजूदा समय में करीब 50 हजार है लेकिन अधिकारियों के पास जो आंकड़ा है उसमें उनकी संख्या 13 हजार बताई जा रही है। ऐसे में अब शहर के दोनों कब्रिस्तानों में जगह नहीं बच पाने की वजह से कब्र के ऊपर कब्र खोदकर शव दफनाए जा रहे हैं।
कई बार ईसाई समाज शासन प्रशासन से गुहार लगाता है कि कब्रिस्तान के लिए नयी जगह की भूमि आबंटित की जाए। लेकिन अभी तक उन्हे जगह मुहैया नहीं कराई गई है। जिसके चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त ईसाई महासंगठन के पदाधिकारी रवीन्द्र सिंह , साइमन प्रसाद ने बताया कि जब किसी की मौत होती है तो उसको दफनाने में काफी परेशानी होती है।
शहर में ईसाई समाज के केवल दो ही कब्रिस्तान बने हुए हैं। जिसमें एक कुदेशिया फाटक व दूसरा सदर गोरा कब्रिस्तान है। उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी योगेश पांडेय को भी अवगत कराया। जिला कल्याण अधिकारी की तरफ से उपजिलाधिकारी को इस समस्या को लेकर पत्र प्रेषित किया गया है।
विलवा या परतापुर में जगह की कर रहे मांग
संयुक्त ईसाई महासंगठन से जुड़े लोगों ने बताया कि प्रशासन की तरफ से उन्हे विलवा या परतापुर में जगह मुहैया करा दी जाए तो बेहतर रहेगा। क्योंकि अधिकतर चर्च भी उधर की साइड में हैं। वहीं अधिकारियों ने जल्द ही उनकी समस्या का समाधान का आश्वासन दिया है।
