सीतापुर: सरकारी शौचालयों में लटक रहे ताले, खुले में शौच जाने को मजबूर ग्रामीण

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सकरन/सीतापुर। सरकार के खुले में शौच मुक्त अभियान को सीतापुर जिले के जिम्मेदार ही पलीता लगाते दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि विकास खंड क्षेत्र के अधिकांश सार्वजनिक शौचालय बंद हैं। उनके ताला लटक रहा है। लोग उनका इस्तेमाल करने के बजाय खुले में शौंच जाने को मजबूर हैं। आरोप लगाए जा …

सकरन/सीतापुर। सरकार के खुले में शौच मुक्त अभियान को सीतापुर जिले के जिम्मेदार ही पलीता लगाते दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि विकास खंड क्षेत्र के अधिकांश सार्वजनिक शौचालय बंद हैं। उनके ताला लटक रहा है। लोग उनका इस्तेमाल करने के बजाय खुले में शौंच जाने को मजबूर हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि तमाम सावर्जनिक शौचालय जमीनी स्तर पर अधूरे पड़े हैं, जबकि कागजों पर उनका निर्माण पूरा करा दिया गया। बंद शौचालयों की सफाई के नाम पर भी सरकारी धन के बंदरबांट कर लेने की चर्चाएं हैं। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।

प्रदेश सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौचमुक्त करने के उद्देश्य से विकास खंड सकरन की 85 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया था। समूचे विकास खंड में लगभग 10 सार्वजनिक शौचालय ऐसे होंगे जो चालू होंगे और करीब 75 सार्वजनिक शौचालय ऐसे हैं, जिनमें ताला लटक रहा। जब कि योगी सरकार का सपना था कि ग्राम स्तर पर कोई भी महिला, पुरुष, बच्चा खुले में शौच के लिए न जाए। जिसके लिए हर ग्राम पंचायत में सार्वजनिक शौचालयों बनाने का आदेश दिया गया और योगी सरकार द्वारा हर ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय बनाने के लिए धन आवंटन किया गया।

ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक शौचालय तो बना दिए गए, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा मौके पर जाकर यह नहीं देखा गया कि सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल हो रहा है या वह बंद पड़े हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायतों में अत्याधिक शौचालय अधूरे पड़े हैं और कागज पर उनको चालू दिखा कर सभी ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों की साफ सफाई के लिए ग्राम पंचायतों में 27-27 हजार रुपए निकाल लिए गए।

सूत्रों का दावा है कि सकरन विकास खंड की ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए लगभग चार करोड़ 63 लाख रुपए और साफ सफाई के नाम पर 22 लाख 95 हजार रुपयों का प्रधानों व सचिवों द्वारा बंदरबांट किया गया है। ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं, लेकिन उच्च अधिकारी मौके पर जाकर जांच करना उचित नहीं समझते।

अगर पूरे मामले की जांच हो जाये तो कई जिम्मेदारों की काली करतूतों की कलई खुल जाएगी। मामले को लेकर जब खंड विकास अधिकारी रजनीश कुमार शुक्ला से बात की गयी तो उन्होने बताया कि जांच करवायी जायेगी। जांच में दोषी पाये जाने पर सम्बन्धित के खिलाफ कार्यवाही होगी।

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