नास्त्रेदमस उवाच : जापान में आएगा विनाशकारी भूकंप, यूरोप में होगा युद्ध सा माहौल

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दुनिया के महान फ्रेंच एस्ट्रोलॉजर नास्त्रेदमस ने वर्ष 2022 के लिए कई बड़ी घटनाओं की भविष्यवाणियां की हैं। उनकी 6,338 भविष्यवाणियां बताती हैं कि दुनिया का अंत कब और कैसे होगा। इन भविष्यवाणियों में हिटलर का शासन, द्वितीय विश्व युद्ध, 9/11 का आतंकी हमला, फ्रांस क्रांति और परमाणु हथियार के विकास जैसी घटनाओं का वर्णन …

दुनिया के महान फ्रेंच एस्ट्रोलॉजर नास्त्रेदमस ने वर्ष 2022 के लिए कई बड़ी घटनाओं की भविष्यवाणियां की हैं। उनकी 6,338 भविष्यवाणियां बताती हैं कि दुनिया का अंत कब और कैसे होगा। इन भविष्यवाणियों में हिटलर का शासन, द्वितीय विश्व युद्ध, 9/11 का आतंकी हमला, फ्रांस क्रांति और परमाणु हथियार के विकास जैसी घटनाओं का वर्णन है। उनकी 70 प्रतिशत से अधिक भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं। नास्त्रेदम का निधन 2 जुलाई, 1566 में हुआ था, लेकिन उनकी भविष्यवाणियां आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं।

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में साल 2022 में दुनिया की बेहद प्रभावशाली और ताकतवर शख्सियत की मौत का अंदेशा जताया गया है। सेंचुरिया की 14वीं चौपाई में उन्होंने लिखा है, ‘एक ताकतवर व्यक्ति की अचानक मौत से बदलाव आएगा। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों पर विश्वास करने वाले उनकी चौपाइयों की अलग-अलग ढंग से व्याख्या करते हैं। ये व्याख्याएं कई बार सटीक होती हैं तो कई बार गलत भी।

विनाशकारी भूकंप से होगी भयानक क्षति
नास्त्रेदमस की सेंचुरिया तृतीय की तीसरी चौपाई में इस साल जापान में विनाशकारी भूकंप आने की भविष्यवाणी की गई है। इसके अनुसार, यदि भूकंप दिन के बीच में आता है तो इससे भयानक क्षति और मृत्यु होंगी। 7 अक्टूबर को 5.9 की तीव्रता वाले एक भूकंप ने विशाल कांटो क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था। हालांकि इससे कम नुकसान हुआ, लेकिन जापान की राजधानी में ये 11 मार्च 2011 को तोहोकू क्षेत्र तबाह करने वाले भूंकप और बाद में आए झटकों में सबसे तेज था।

यूरोप में होगा युद्ध का सा माहौल
आगामी वर्ष के लिए नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों की कुछ व्याख्याओं के अनुसार यूरोप में युद्ध जैसा माहौल होगा। इस साल फ्रांस की राजधानी में कोविड प्रतिबंधों को लेकर हुए दंगों के अराजक दृश्य पहले ही देखे जा चुके हैं। इससे पूर्व 2015 में भी ISIS के आतंकी हमले में 130 लोग मारे गए थे। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रांस में हुआ सबसे बड़ा हमला था।

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