काशीपुर: उपभोक्ताओं के लिए सिर दर्द बने विद्युत मीटर रीडर
अरुण कुमाार, काशीपुर, अमृत विचार। ऊर्जा निगम में कार्यरत कुछ मीटर रीडर उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। चालू मीटर को खराब दिखाकर आईडीएफ का बिल बना उपभोक्ताओं को थमाने में लगे हैं। उपभोक्ता बिजली बिल ठीक कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं एक वर्ष पुराने बिजली बिल कंप्यूटर …
अरुण कुमाार, काशीपुर, अमृत विचार। ऊर्जा निगम में कार्यरत कुछ मीटर रीडर उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। चालू मीटर को खराब दिखाकर आईडीएफ का बिल बना उपभोक्ताओं को थमाने में लगे हैं। उपभोक्ता बिजली बिल ठीक कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं एक वर्ष पुराने बिजली बिल कंप्यूटर में ठीक नहीं होने पर उपभोक्ताओं को फजीहत झेलनी पड़ रही है।
दरअसल कुछ वर्ष पूर्व ऊर्जा निगम ने मुख्यालय स्तर पर मीटर रीडिंग लेने का एक कंपनी को ठेका दिया है। कंपनी के तहत काशीपुर में कई मीटर रीडर अपने-अपने क्षेत्र में मीटर रीडिंग लेने काम कर रहे हैं। आरोप है कि विभिन्न क्षेत्रों में कुछ मीटर रीडर आईडीएफ का भारी भरकम बिल बनाकर उपभोक्ता को दे रहे हैं, जबकि मीटर चालू हालत में होते हैं।
उपभोक्ता बिल ठीक कराने के लिए ऊर्जा निगम कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। कार्यालयों में कर्मचारी एक कक्ष से दूसरे कक्ष भेजकर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं। साथ ही सिस्टम एक वर्ष पुराने बिजली बिल ठीक करने से मना कर दे रहा है। जिसका उपभोक्ता को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एक दूसरे कर्मचारी के पास जाकर भटकने को मजबूर हो रहा है।
रोज 3-4 उपभोक्ता बिजली बिल ठीक कराने की शिकायतें लेकर कार्यालय पहुंच रहे हैं। हाल ही में ऐसे ही एक समस्या लेकर उपभोक्ता चक्कर लगा रहे था, जिसका नौ महीने बाद ऑफलाइन समस्या का समाधान हो सका। उपभोक्ताओं ने बताया कि मीटर चालू होने के बावजूद रीडिंग लिए बिना ही आईडीएफ का बिल दे रहे हैं।
कार्यालय से मिली जानकारी में बताया गया कि एक वर्ष पुराने बिजली बिल कंप्यूटर में ठीक नहीं हो रहे हैं। सिस्टम मना कर दे रहा है। ऐसे तीन-चार केस रोज पहुंच रहे हैं। ऐसे केस को मैनुअल करना होता है। जिसमें काफी समय बर्बाद हो रहा है।
कुछ उपभोक्ता खुद कर रहे हैं मीटर खराब
काशीपुर। सूत्रों ने बताया कि कुछ क्षेत्र ऐसे भी जहां कुछ उपभोक्ता मीटर रीडरों से सांठगांठ कर बिजली बिल कम बना रहे हैं। बाद में मीटर खराब कर ऊर्जा निगम कर्मियों को परेशान करने में लगे हैं। जिससे कर्मियों पर काम बोझ बढ़ता जा रहा है। पूछने पर मीटर रीडर कर्मियों से माफी मांगकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
रीडर पर आईडीएफ बिल बनाने का आरोप
काशीपुर। नाम प्रकाशित नहीं करने पर एक उपभोक्ता ने बताया कि वर्ष 2016-17 में चामुंडा विहार कालोनी में एक विद्युत कनेक्शन लिया था। मीटर में रीडिंग आ रही थी, लेकिन मीटर रीडर ने 55 हजार से अधिक का आईडीएफ बिल बना दिया था। 9 महीने से बिजली बिल ठीक कराने के लिए भटक रहा हूं। कंप्यूटर से संशोधन नहीं हो पाया। काफी प्रयास के बाद समस्या का समाधान अब मैनुअल हो सका है।
बिल जमा कराने को भटक रहे उपभोक्ता
काशीपुर। दूसरे उपभोक्ता ने बताया कि टांडा उज्जैन मीटर में रीडिंग आ रही थी। मीटर रीडर ने मीटर चालू होने के बावजूद बिजली बिल आईडीएफ बना दिया। एसडीओ व जेई ने भी रिपोर्ट लगाकर दे दी थी। मार्च से बिल ठीक कराने के लिए भटक रहा था, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। अब उपभोक्ता फोरम में समस्या का समाधान हो सका है।
मीटर रीडर प्राइवेट कंपनी के तहत काम कर रहे हैं। यदि मीटर में रीडिंग आने के बाद भी आईडीएफ का बिल बनाया जा रहा है तो ऐसे मामले का पता कर जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
– नवीन मिश्रा, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम, काशीपुर
