कौशांबी: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इन मुद्दों के साथ उतरेंगे चुनावी समर में

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कौशांबी। एक दशक पहले सिराथू विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का खाता खोलने वाले केशव प्रसाद मौर्य मौजूदा विधानसभा चुनाव में विकास और राष्ट्रीयता के मुद्दे के साथ एक बार फिर क्षेत्र की जनता के बीच जायेंगे। भाजपा द्वारा शनिवार को जारी पार्टी प्रत्याशियों की सूची में मौर्य को पिछड़ा और दलित बाहुल्य …

कौशांबी। एक दशक पहले सिराथू विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का खाता खोलने वाले केशव प्रसाद मौर्य मौजूदा विधानसभा चुनाव में विकास और राष्ट्रीयता के मुद्दे के साथ एक बार फिर क्षेत्र की जनता के बीच जायेंगे। भाजपा द्वारा शनिवार को जारी पार्टी प्रत्याशियों की सूची में मौर्य को पिछड़ा और दलित बाहुल्य सिराथू विधानसभा के लिये उम्मीदवार बनाया गया है। सिराथू विधानसभा 1980 से लेकर 2012 तक आरक्षित सीट रही है।

2012 में सामान्य सीट घोषित होने के बाद पिछड़े वर्ग से केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था,नतीजन भाजपा काे आजादी के बाद पहली बार इस सीट पर जीत का स्वाद चखने को मिला। वर्ष 2014 में केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद निर्वाचित हो गए जिसके बाद सिराथू सीट पर हुये उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के वाचस्पति ने भाजपा के नये उम्मीदवार शीतला प्रसाद पटेल को आसानी से शिकस्त दे दी।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर शीतला प्रसाद पर दांव खेला और मोदी लहर के बीच उन्होने वाचस्पति को आसानी से पटकनी देते हुये भाजपा का झंडा बुलंद किया। सिराथू विधानसभा क्षेत्र में 11 फीसदी पटेल मतदाता है जबकि क्षेत्र में 57 प्रतिशत अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के मतदाता है वहीं ब्राह्मण मतदाताओं का प्रतिशत 19 है। वर्ष 2002 से 2012 के बीच क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने यहां से अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। 2022 के चुनाव में बसपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार संतोष त्रिपाठी पर भरोसा जताया है हालांकि सपा और कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सिराथू विधानसभा में इस बार ब्राह्मण एवं पटेल मतदाता निर्णायक भूमिका में होंगे। पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने का विशेष असर इस सीट पर नहीं पड़ेगा। शीतला प्रसाद पटेल को टिकट न मिलने से एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिलेर सिंह पटेल की नाराजगी से हालांकि भाजपा को कुछ नुकसान हो सकता है। मौर्य स्थानीय विकास एवं राष्ट्रीयता का मुद्दाें के अलावा लोक कल्याणकारी योजनाएं के सफल क्रियान्वयन को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।

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