हल्द्वानी: गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय का ये कैसा हाल, युवा बोले- कुछ तो करो सरकार
हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में कभी चार लाइब्रेरी हुआ करती थीं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के साथ बुजुर्ग भी कुछ समय किताबों के बीच बिताने के लिए पुस्तकालय पहुंचा करते थे। अनदेखी के चलते शहर के ये पुस्तकालय धीरे-धीरे बदहाल होते जा रहे हैं। रोडवेज स्टेशन के …
हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में कभी चार लाइब्रेरी हुआ करती थीं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के साथ बुजुर्ग भी कुछ समय किताबों के बीच बिताने के लिए पुस्तकालय पहुंचा करते थे। अनदेखी के चलते शहर के ये पुस्तकालय धीरे-धीरे बदहाल होते जा रहे हैं। रोडवेज स्टेशन के पास पंडित गोविंद बल्लभ पंत पुस्तकालय किताबों के शौकीनों का एकमात्र आसरा है। यहां न केवल हल्द्वानी बल्कि पहाड़ के दूरदराज के क्षेत्रों से युवा पढ़ाई करने को जुटते हैं। लेकिन सरकारी तंत्र की अनदेखी से पुस्तकालय में हर कदम पर अव्यवस्था हावी हैं।
ऐसे में जब पुस्तकालय में समय बिताने वाले युवाओं से अमृत विचार की टीम ने बात की तो उन्होंने मौजूद अव्यवस्थाओं पर पीड़ा जाहिर की। नमिता सैलाल और राहुल कुमार ने बताया कि पुस्तकालय खुलने की टाइमिंग सही न होने और प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें उपलब्ध न होने से निराशा होती है। वहीं समुचित प्रकाश व्यवस्था, पीने के पानी का अभाव और वॉशरुम में सफाई न होने से भी दिक्कत उठानी पड़ती है। युवाओं ने जनप्रतिनिधियों ने पुस्तकालय की हालत सुधारने की मांग की है।
आपको बता दें कि 15 अक्टूबर 1953 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने इस पुस्तकालय का शिलान्यास किया था। लेकिन निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से पुस्तकालय अपने वजूद को खोता जा रहा है। पुस्तकालय के सहायक कामरान सिद्दीकी ने बताया कि बजट के अभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। जल्द ही इस कमी को भी दूर कर दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य सुविधाओं को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
