हल्द्वानी: बारिश, पाला और अब कोहरे से फसलों पर फफूंद की मार
हल्द्वानी, अमृत विचार। मौसम की बेरुखी ने किसानों को मायूस कर दिया है। जनवरी के महीने में अत्यधिक बारिश, पाला और अब कोहरे की मार से सब्जियों के साथ-साथ आम, लीची की बागवानी और फूल तक मुरझा गए हैं। कृषि जानकारों के मुताबिक, जमीन में आद्रता का स्तर बढ़ने से फसलों में गलन यानि कोल्ड …
हल्द्वानी, अमृत विचार। मौसम की बेरुखी ने किसानों को मायूस कर दिया है। जनवरी के महीने में अत्यधिक बारिश, पाला और अब कोहरे की मार से सब्जियों के साथ-साथ आम, लीची की बागवानी और फूल तक मुरझा गए हैं।
कृषि जानकारों के मुताबिक, जमीन में आद्रता का स्तर बढ़ने से फसलों में गलन यानि कोल्ड रोट का खतरा बढ़ जाता है। जिस कारण ठंड में रहने वाले फफूंद सक्रिय हो जाते हैं और पाउड्री मिल्ड्यू , डाउनी मिल्ड्यू, अल्टरनेरिया ब्लाइट और खर्रा बीमारी से पौधों की वानस्पतिक वृद्धि पर भी असर पड़ता है। यह फफूंद पत्तियों और तने पर सफेद, धूसर या हल्के क्रीम रंग में दिखाई देती है। कीट रोग विशेषज्ञ बीडी शर्मा ने बताया कि मौसम के खुलने के बाद किसान सल्फरयुक्त रसायन का स्प्रे कर फसलों को फफूंद की मार से बचा सकते हैं।

विशेषज्ञ की बात
बारिश और कोहरे के कारण जमीन में नमी बढ़ने से विशेषकर सब्जी की फसलों में रोग की आशंका बढ़ जाती है। फसलों में मटर, बीन, सरसों, मिर्च, गोभी, चना और चारे की फसल समेत आम, लीची भी फफूंद की चपेट में आते हैं। गुलाब, गेंदा आदि पर भी फफूंदी का असर देखने को मिलता है। मौसम खुलने पर सल्फर 80 प्रतिशत डब्ल्यूपी या सल्फर युक्त रसायनों का स्प्रे कर सकते हैं। – बीडी शर्मा, कीट रोग विशेषज्ञ
किसानों की पीड़ा:

जनवरी में लगातार कोहरा लगने से खासतौर पर चौड़ी पत्ती वाली फसलें प्रभावित हुई हैं। गन्ना और पशुओं के चारे के लिए बरसीम पीली पड़ गई हैं। हालांकि गेहूं और जौ के लिए राहत है। – नरेंद्र सिंह मेहरा, गौलापार

पहले बारिश और अब कोहरे की मार से फसलों को नुकसान पहुंचा है। प्याज और टमाटर की फसल खराब हो रही है। इस बार लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। – कांति बल्लभ गरजोला, कोटाबाग
