रायबरेली: कई चुनाव बीत गए लेकिन नहीं बन सका पुल, नाव से सफर करने को मजबूर हैं ग्रामीण
रायबरेली। कितने चुनाव बीते लेकिन जिले के दो गांव पूरे पासी व पूरे गोड़िया के लोग आवागमन के लिए अभी भी नाव का सहारा लेते हैं। हाल यह है कि यहां के लोग आज भी नाव के सहारे ही मतदान करने जाते हैं। आम चुनाव हो या विधानसभा। हर बार यहां के लोगों में उम्मीदों …
रायबरेली। कितने चुनाव बीते लेकिन जिले के दो गांव पूरे पासी व पूरे गोड़िया के लोग आवागमन के लिए अभी भी नाव का सहारा लेते हैं। हाल यह है कि यहां के लोग आज भी नाव के सहारे ही मतदान करने जाते हैं। आम चुनाव हो या विधानसभा। हर बार यहां के लोगों में उम्मीदों का चिराग जलने लगता कि शायद इस बार उनकी आस पूरी हो सके। दशकों बीत गए और यहां के लोगों की आंखें बूढ़ी हो गई, लेकिन पक्का पुल नहीं बन सका।
डीह ब्लाक क्षेत्र के कचनावां ग्राम पंचायत के दो पुरवा पूरे पासी व पूरे गोड़िया। यहां की दशा आजादी के बाद से नहीं बदल सकी। इन गांवों की आबादी 500 और मतदाता करीब 200 हैं। दोनों गांव महराजगंज ड्रेन (नईया नाला) व सई नदी के बीच बसे हैं। यहां के लोग मतदान के लिए पहले पगडंडियों व खेतों की मेड़ से होकर नदी किनारे पहुंचते हैं। यहां से नाव से नदी पार कर कचनावां गांव में बने प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र पहुंचते हैं।
इसके लिए उन्हें किराया भी चुकाना पड़ता है। नाव के सहारे न आने लोगों को पगडंडियों के सहारे दो किमी पैदल चलना पड़ता है और फिर सड़क मार्ग से लगभग 12 किमी का चक्कर लगाकर कचनावां में बने मतदान केंद्र पर पहुंचते हैं। गांव के 80 वर्षीय श्रीनाथ, 76 वर्षीय हीरालाल, 75 साल के सत्तीदीन, 70 वर्षीय रामस्वरूप ने बताया कि हर चुनाव में उम्मीद रहती कि इस बार जरूर जनप्रतिनिधि हम लोगों की पीड़ा समझेंगे और पुल बनवाएंगे, लेकिन बूढ़ी आंखें पक्का पुल नहीं देख सकी। जैसे हमारा जीवन नाव के सहारे कट गया वैसे ही आने वाली पीढि़यां भी काटेंगी।
पूर्व प्रधानमंत्री ने बनवाया था अस्थायी पुल
ग्रामीणों की ही मांग पर 34 वर्ष पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के कहने पर महराजगंज ड्रेन में ह्यूम पाइप डाल कर अस्थायी पुल का निर्माण किया गया, लेकिन यह ज्यादा दिन चल न सका और बारिश में पुल बह गया। इसके बाद से पुल बनाने का कोई प्रयास नहीं हुआ। 2018 में तत्कालीन जिलाधिकारी संजय खत्री ने सिंचाई विभाग की टीम भेजकर पुल बनवाने के लिए इस्टीमेट बनवाया था, लेकिन वह प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
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