हल्द्वानी: जब अस्पताल में भर्ती मरीज ने कहा ‘मैं आखिरी बार वोट देना चाहता हूं… मुझे वोट देने से मत रोको’
दीपिका नेगी, हल्द्वानी, अमृत विचार। “मैं बस एक आखिरी बार अपना वोट देना चाहता हूं…शायद कल जिंदगी रहे न रहे। लेकिन आज, अभी अपने मत का प्रयोग जरूर करुंगा। ये हर नागरिक का कर्तव्य है, उसे निभाना चाहिए। क्या पता मेरा एक वोट किसी की किस्मत बदल दे…” हल्द्वानी के खालसा इंटर कॉलेज में बने …
दीपिका नेगी, हल्द्वानी, अमृत विचार। “मैं बस एक आखिरी बार अपना वोट देना चाहता हूं…शायद कल जिंदगी रहे न रहे। लेकिन आज, अभी अपने मत का प्रयोग जरूर करुंगा। ये हर नागरिक का कर्तव्य है, उसे निभाना चाहिए। क्या पता मेरा एक वोट किसी की किस्मत बदल दे…” हल्द्वानी के खालसा इंटर कॉलेज में बने मतदान केंद्र पर गंभीर हालत में पहुंचे 67 वर्षीय एक बुजुर्ग का यही कहना था। बीमार हालत में भी मतदान के प्रति उनका ऐसा जज्बा था कि वह अपनी जिद से अस्पताल से अनुमति लेकर मतदान केंद्र तक पहुंचे।
वैलेजली लॉज निवासी दीवान सिंह बिष्ट अस्पताल में एक माह से भर्ती चल रहे हैं। अपनी पत्नी देवकी देवी के साथ ऑटो में जब मतदान केंद्र तक पहुंचे तो सभी का ध्यान उनकी ओर गया। यूरीन बैग और व्हील चेयर के सहारे वोट देने पहुंचे दीवान के चेहर पर बीमारी के कारण काफी दर्द झलक रहा थे। उनकी पत्नी देवकी ने बताया कि पति के हाथ पैर काम नहीं कर रहे हैं। सिर की नस ब्लॉक हो गई है। हालत गंभीर है। पिछले एक महीने से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है, लेकिन वोट देने की इतनी चाहत थी कि कल रात से मुझसे जिद कर रहे थे कि मैं बस आखिरी बार वोट और देना चाहता हूं। मुझे वोट देने से मत रोको। देवकी ने बताया कि उनका दिल नहीं तोड़ना चाहती थी, इसलिए अस्पताल से अनुमति लेकर उन्हें यहां वोट दिलाने के लिए लाए हैं।
वहीं दीवान ने कहा कि किसी की सत्ता को बनाने और गिराने के लिए एक-एक वोट की कीमत मायने रखती होती है। मेरा एक वोट किसी को सफल बना सकता है। जीने की उम्मीद तो छोड़ चुका हूं, लेकिन वोट देने की चाहत अभी जिंदा है। इसलिए यहां आया हूं।
बोल-सुन नहीं सकते, लेकिन हर साल वोट देते हैं मूक-बधिर दंपती
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवलचौड़ में बने मतदान केंद्र पर सुबह मतदाताओं की खासी चहल-पहल रही। इनमें एक मूक-बधिर दंपती भी मतदान केंद्र पर अपने मत का प्रयोग करने पहुंचे। उनके बेटे भुवन नेगी ने बताया कि उनके माता पिता जन्म से ही मूक-बधिर हैं। लेकिन वोट की कीमत समझते हुए वह हर साल उन्हें मतदान के लिए लाते हैं। 57 वर्षीय मां गंगा देवी और 60 वर्षीय पिता वीरेंद्र सिंह ने अपनी अभिव्यक्तियों से ही वोट देने के बाद की खुशी जाहिर की। वहीं भुवन ने बताया कि दोनों ही हमेशा से अपने वोट के प्रयोग को लेकर उत्साहित रहते हैं।
वोट का प्रयोग करने पिता की क्रिया से उठकर आए जगदीश
वोट डालने का ऐसा उत्साह था कि लोग कठिन परस्थिति में भी महापर्व में अपना योगदान देने पहुंचे। जगदीश चंद्र के पिता का छह दिन पहले निधन हुआ था। वह मृतक की आत्मा शांति के लिए की जाने वाली 13 दिन की क्रिया में बैठे थे, फिर भी अपने वोट की अहमियत समझते हुए वह अपने खालसा इंटर कॉलेज अपने मतदान केंद्र पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक वोट से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी, इसलिए मेरा एक वोट भी उतना ही जरूरी है।
दिव्यांग मां को गोद में उठाकर लाया बेटा
वोट डालने का जज्बा ऐसा था कि एक बेटा अपनी दिव्यांग मां को गोद में उठाकर मतदान केंद्र तक लाया। बेटे के सहारे ठंडी सड़क स्थित खालसा इंटर कॉलेज में बने आदर्श बूथ पर पहुंची 70 वर्षीय मां लीला देवी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लीला देवी ने अपनी बारी का इंतजार व्हीलचेयर में बैठकर किया, बेटे ने बताया कि उनकी माता दिव्यांग है, लेकिन हर साल वह मां को वोट दिलाने लाते हैं।
वॉकर के सहारे वोट देने पहुंचे कालिदास
वोट देने के उत्साह में 65 वर्षीय कालिदास नैनीताल रोड स्थित अपने घर से अकेले ही वॉकर के सहारे वोट देने पहुंच गए। चलने में असमर्थ थे लेकिन पूछने पर बताया कि कोई नहीं अभी मतदान ज्यादा जरूरी है। धीरे-धीरे वॉकर के सहारे घर तक चला जाउंगा।
79 वर्षीय मां को वोट दिलाने पहुंचा 57 वर्षीय बेटा
मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के अलग-अलग रंग देखने को मिले। इन्हीं में से एक महिला डिग्री कॉलेज में बने सखी बूथ पर भी देखने को मिला, जहां एक 79 वर्षीय मां को वोट दिलाने उनका 57 वर्षीय बेटा वोट दिलाने पहुंचा। बेटे के सहारे मां बूथ तक पहुंची और मतदान किया। राजीव अग्रवाल ने बताया कि मेरी माता जी हर वर्ष अपने वोट का प्रयोग करती हैं। बुढ़ापे होने के कारण चलने-फिरने में दिक्कत होती है। लेकिन वोट देने का उनका उत्साह बना रहता है।





