हल्द्वानी: 20 सालों में सड़क दुर्घटनाओं में 17 हजार मौतें

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बबीता पटवाल, हल्द्वानी, अमृत विचार। राज्य के पर्वतीय इलाकों में सड़कें तो बन गईं लेकिन कम चौड़ी सड़कें होने और सड़कों के किनारे सुरक्षा प्रबंध कम किए जाने की वजह से हादसे होना आम बात हो गई है। राज्य गठन के बाद से अभी तक 17 हजार से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान …

बबीता पटवाल, हल्द्वानी, अमृत विचार। राज्य के पर्वतीय इलाकों में सड़कें तो बन गईं लेकिन कम चौड़ी सड़कें होने और सड़कों के किनारे सुरक्षा प्रबंध कम किए जाने की वजह से हादसे होना आम बात हो गई है।

राज्य गठन के बाद से अभी तक 17 हजार से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा बैठे हैं। राज्य में राजमार्गों के अलावा अन्य मार्गों पर स्थिति घातक और जानलेवा है। परिवहन विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले छह सालों में सितंबर तक उत्तराखंड में 7993 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 5028 लोगों की जान गई है।

पिछले छह सालों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि उत्तराखंड में हर साल औसत 1322 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें 838 लोग मारे जा रहे हैं। वहीं, बात करें 20 साल की तो उत्तराखंड में अब तक 27 हजार से ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। इन सड़क हादसों में 17 हजार से ज्यादा लोग मारे गए और सबसे ज्यादा बुरा उन लोगों के साथ हुआ जो इन हादसों में बच तो गए, लेकिन आज अपाहिज हैं।

राज्य बनने के बाद से अब तक
राज्य बनने के बाद से अब तक यानी फरवरी 2022 तक प्रदेश में कुल 27,492 सड़क हादसे हुए हैं। इन सड़क हादसों में 17,619 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। जबकि 32,084 लोग घायल हो गए। इन घायलों में ऐसे लोगों की संख्या अच्छी खासी है, जिन्होंने अपने शरीर का कोई न कोई अंग खो दिया।

मौत या घायल होने पर इतनी मिलती है आर्थिक मदद
उत्तराखंड सड़क परिवहन दुर्घटना राहत निधि नियमावली 2008 के अनुसार सार्वजनिक सेवायान से दुर्घटना होने पर मृत्यु और गंभीर रूप से घायल होने पर एक-एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। जबकि घायल होने की स्थिति में यदि व्यक्ति को 20 दिन तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है तो 40 हजार रुपये देने का प्रावधान है। जबकि सामान्य रूप से घायल होने पर 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उत्तराखंड सड़क परिवहन दुर्घटना राहत निधि से राज्य गठन के बाद से फरवरी 2022 के मध्य तक 16 करोड़ 82 लाख 51 हजार रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।

आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि उत्तराखंड में हो रहे सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में कम से कम छह फीट की सुरक्षा दीवार का निर्माण करना चाहिए। खासकर दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्रों में ऐसे ही छोटे-छोटे पैराफिट बनाने से बड़े हादसों से बचा जा सकता है।

अगर पुलिस सतर्कता रखती तो टल जाता हादसा
हल्द्वानी। चंपावत में हुए हादसे में एक बात सामने आई है कि अगर पुलिस सतर्कता रखती तो शायद यह जानलेवा हादसा टल जाता। उत्तराखंड में नियम है कि रात आठ बजे के बाद सुबह तक भारी वाहनों को पहाड़ी इलाकों में सफर करने की अनुमति नहीं है। हादसे वाले वाहन के रास्ते में पुलिस चेक पोस्ट भी पड़ी थीं। अगर पुलिस वाहन को रुकवा देती तो शायद यह हादसा नहीं होता। हालांकि आमजन को भी नियमों का स्वयं पालन करना चाहिए। आरटीओ संदीप सैनी भी ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रात आठ बजे के बाद वाहनों के संचालन में सख्त रोक है। लेकिन इसके बावजूद लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं।

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं और मारे गए लोगों की संख्या

वर्ष            दुर्घटनाओं की संख्या            मृतकों की संख्या
2016               1591                                  962
2017               1603                                  942
2018               1468                                 1047
2019               1353                                   886
2020               1041                                   674
2021               1405                                  1091
कुल                 7932                                  5028

 

संभावित स्थलों की संख्या जनपदवार

जनपद        दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र                चेतावनी बोर्ड
उत्तरकाशी       25                                   28
टिहरी              58                                   84
पौड़ी               53                                    81
चमोली            64                                    67
रूद्रप्रयाग        26                                    30
देहरादून          58                                    77
हरिद्वार           34                                     48
नैनीताल          79                                     33
ऊधमसिंहनगर 76                                   105
अल्मोड़ा          65                                     74
पिथौरागढ़        62                                     63
चम्पावत          56                                     48
बागेश्वर           59                                      41

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