रुद्रपुर: पलटे पीएमएस, अब लिखित में शिकायत का इंतजार
रुद्रपुर, अमृत विचार। तीन मार्च की आधी रात को महेंद्र पाल अपनी तड़पती पत्नी अमरवती को प्रसूति के लिए जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल पहुंचा। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने यहां सुविधा नहीं होने की बात कहते हुए भर्ती करने से मना कर दिया। इस पर पीएमएस डॉ. डीएस पंचपाल ने जांच कराने की बात …
रुद्रपुर, अमृत विचार। तीन मार्च की आधी रात को महेंद्र पाल अपनी तड़पती पत्नी अमरवती को प्रसूति के लिए जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल पहुंचा। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने यहां सुविधा नहीं होने की बात कहते हुए भर्ती करने से मना कर दिया। इस पर पीएमएस डॉ. डीएस पंचपाल ने जांच कराने की बात कही थी, लेकिन अब पीएमएस ने पलटी मार दी है। अब पीएमएस लिखित शिकायत न करने की बात कह मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं।
शहर के ट्रांजिट कैंप के वार्ड नंबर एक शिवनगर निवासी महेंद्र पाल अपनी पत्नी को भर्ती कराने जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने वहां ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए भर्ती नहीं किया। गर्भवती वहां दो घंटे तक तड़पती रही और अस्पताल के कर्मचारी मूकदर्शक बने रहे।
पति ने पत्नी की जान बचाने के लिए उसे भोर में निजी अस्पताल में भर्ती किया। जहां चार मार्च की सुबह पत्नी को ऑपरेशन से बच्चा हुआ। पति मजदूरी करता है और उसका ब्रेन ट्यूमर का इलाज छह महीने से दिल्ली के एम्स में चल रहा है। निजी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए 38 हजार, इमरजेंसी बेड चार्च आठ हजार, बच्चे को रखने का छह हजार के साथ ही प्रति बोतल ब्लड चढ़ाने का एक दिन ढाई हजार सहित लगभग 60 हजार रुपये भुक्तभोगी से वसूला गया। जिसे महेंद्र ने किसी तरह कर्ज लेकर चुकता किया।
स्टाफ का दबाव काम आया
बताया जा रहा है कि यदि इस मामले की जांच होती तो अस्पताल के स्टाफ पर कार्यवाही होती। इसी के चलते अस्पताल के स्टाफ ने इस मामले में प्रबंधन पर दबाव बनाया। इसी के चलते पीएमएस अब लिखित शिकायत की बात कह रहे हैं।
इस मामले में किसी ने लिखित शिकायत नहीं की है। अगर कोई लिखित शिकायत करता है। तो इसकी जांच की जांच की जाएगी।
डॉ. डीएस पंचपाल,
पीएमएस, जिला अस्पताल, रुद्रपुर
