रुद्रपुर: क्या सुलझेगा थारूलैंड की भूमि का मसला…
रुद्रपुर, अमृत विचार। तराई में थारूलैंड की भूमि का मुद्दा पिछले करीब पांच दशक से चला आ रहा है। पिछले पांच साल में इस मुद्दे को हल न कर पाने की सजा कहीं न कहीं भाजपा को दो सीटे गंवाने के रूप में भुगतनी पड़ी। अब जब धामी ने फिर से सत्ता संभाली है तो …
रुद्रपुर, अमृत विचार। तराई में थारूलैंड की भूमि का मुद्दा पिछले करीब पांच दशक से चला आ रहा है। पिछले पांच साल में इस मुद्दे को हल न कर पाने की सजा कहीं न कहीं भाजपा को दो सीटे गंवाने के रूप में भुगतनी पड़ी। अब जब धामी ने फिर से सत्ता संभाली है तो उम्मीद जगी है कि इस ज्वलंत मुद्दे पर सरकार कोई निर्णय लेगी।
दरअसल, तराई के खटीमा, नानकमत्ता व सितारगंज क्षेत्र थारू जनजाति निवास करती है। आजादी के बाद इस जनजाति के लोगों को भूमि आवंटित की गयी थी। तब यह व्यवस्था दी गई थी कि इस जनजाति के नाम पर दर्ज इस भूमि को बेचा नहीं जा सकेगा। बाद में जनजाति के लोगों ने इन जमीनों को अपनी आवश्यकतानुसार बेचना शुरू कर दिया।
सौ रुपये के स्टाम्प में पर इन जमीनों की खरीद-फरोख्त शुरू हो गई लेकिन रजिस्ट्री या मालिकाना हक परिवर्तन नहीं किया सकता है। इसके चलते खटीमा, नानकमत्ता व सितारगंज क्षेत्र का विकास भी काफी हद तक रूका हुआ है। जमीन खरीदने वाले इस भूमि के मालिक नहीं बन पा रहे हैं। इसके चलते काफी दिक्कतें है।
इस मामले को सुलझाने के लिये कई बार प्रयास हुये लेकिन नतीजा सिफर रहे। छह महीने के कार्यकाल में राज्य के कई बड़े मुद्दे सुलझाने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने गृहक्षेत्र की समस्या पर ध्यान नहीं दे सके। माना जा रहा है कि इसी का खामियाजा भाजपा को खटीमा व नानकमत्ता की सीट गंवाकर भुगतना पड़ा। अब उम्मीद है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मुद्दे को सुलझाएंगे।
रुद्रपुर में भी दानपात्र की भूमि का मुद्दा अनसुलझा
रुद्रपुर। थारूलैंड की तरह जिला मुख्यालय पर भी दानपात्र की भूमि का मुद्दा अनसुलझा है। इस भूमि पर मालिकाना हक की मांग पिछले काफी समय से की जा रही है। चूंकि नजूल भूमि पर मालिकाना हक दिये जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह भी धामी सरकार में ही हुआ। अब दानपात्र की भूमि पर भी जनता को कुछ ऐसे ही फैसले की उम्मीद है।
