विश्व मलेरिया दिवस: समय से जांच कराकर कराएं इलाज, मलेरिया से पाएं निजात

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बहराइच। आज विश्व मलेरिया दिवस है। मलेरिया रोग मादा एनोफिलिज के काटने से होता है। ऐसे में समय से जांच और अपने आसपास साफ सफाई रखने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। मच्छरों से बचाव और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच व इलाज मलेरिया से बचाव का बेहतर उपाय है। चार से आठ …

बहराइच। आज विश्व मलेरिया दिवस है। मलेरिया रोग मादा एनोफिलिज के काटने से होता है। ऐसे में समय से जांच और अपने आसपास साफ सफाई रखने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।

मच्छरों से बचाव और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच व इलाज मलेरिया से बचाव का बेहतर उपाय है। चार से आठ घंटे के चक्र में बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, पसीना आना और मिचली व उल्टी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत आशा कार्यकर्ता या स्वास्थ्यकर्मी की मदद से प्रशिक्षित चिकित्सक को दिखा कर मलेरिया की जांच करानी चाहिए। इसकी जांच सभी सरकारी अस्पतालों व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर निःशुल्क उपलब्ध है। वहीं समय से जांच व इलाज न होने से मलेरिया जानलेवा हो सकता है। साथ ही मलेरिया के लक्षण समाप्त होने पर भी दवा बीच में बंद नहीं करनी चाहिए बल्कि इसका पूरा इलाज कराना चाहिए।

मादा मच्छर एनोफीलिज के काटने के कारण होता है- मलेरिया

यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 सतीश कुमार सिंह का। उन्होंने बताया कि मलेरिया बीमारी मादा मच्छर एनोफीलिज के काटने के कारण होती है। संक्रमित मच्छर काटने के बाद स्वस्थ मनुष्य में 10 से 14 दिन बाद यह रोग विकसित होता है। मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति में लाल रक्तकोशिकाओं के नष्ट होने के कारण थकान, खून की कमी, दौरा या चेतना हानि की स्थिति बन जाती है। वहीं गर्भावस्था में मलेरिया का होना गर्भवती के साथ-साथ भ्रूण और नवजात के लिए भी खतरा बन जाता है।

एसीएमओ वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम डॉक्टर जयंत कुमार जिला ने बताया कि मलेरिया का मच्छर सामान्यतः शाम और सुबह के बीच काटता है। मच्छर के काटने के बाद इसका परजीवी लीवर के जरिये लाल रक्त कोशिकाओं तक पहुंचता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगता है। साथ ही यह रक्त कोशिकाओं को भी तोड़ने लगता है जिसकी वजह से व्यक्ति एनीमिक हो जाता है। उन्होने बताया संक्रमित रक्त कोशिकाएं हर 48 से 72 घंटे में फटती रहती हैं और यह जब भी फटती हैं। व्यक्ति में बुखार, ठंड लगना और पसीना आने जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।

पूरी बांह के पहने कपड़े

स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह का कहना है कि आशा कार्यकर्ता व मलेरिया निरीक्षकों की टीम जिले में मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए संबंधित विभागों और सामुदायिक योगदान के जरिये अभियान में जुटे हुए हैं, लेकिन लोगों की सतर्कता अधिक आवश्यक है। मलेरिया बचाव का सबसे बेहतर उपाय है कि पूरी बांह के कपड़े पहने, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, मच्छर रोधी क्रीम लगाएं, घर में मच्छररोधी अगरबत्ती का इस्तेमाल करें । लार्वा को खाने वाली गम्बुसिया मच्छली को कुओं और तालाबों में डाले, खुली नालियों में मिट्टी का तेल डालें ताकि मच्छरों के लार्वा न पनपने पाएं, मच्छरों के काटने के समय शाम व रात को घरों और खिड़कियों के दरवाजे बंद कर लें। इन उपायों के बावजूद अगर लक्षण दिखें तो मलेरिया की जांच करवा कर इलाज अवश्य करवाएं।

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