कोरोना ने पंचर किया स्कूली वाहनों का कारोबार, नहीं भर पाए टैक्स तो सरेंडर किया परमिट
लखनऊ। कोरोना संक्रमण के चलते स्कूली वाहन के कारोबारियों को करारा झटका लगा है। कमाई न हो पाने के कारण राजधानी में बहुत से स्कूली वाहन मालिकों ने अपने वाहन परमिट सरेंडर कर दिए और वाहनों को बेच भी दिया। स्कूली वाहनों की कमी का खामियाजा अब स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल …
लखनऊ। कोरोना संक्रमण के चलते स्कूली वाहन के कारोबारियों को करारा झटका लगा है। कमाई न हो पाने के कारण राजधानी में बहुत से स्कूली वाहन मालिकों ने अपने वाहन परमिट सरेंडर कर दिए और वाहनों को बेच भी दिया। स्कूली वाहनों की कमी का खामियाजा अब स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल जाने के लिए वे ई रिक्शा से लेकर ऑटो तक में सफर करने को मजबूर हैं।विभागीय अधिकारियों के अनुसार कोविड-19 के चलते दो वर्षों तक स्कूल और कॉलेज पूरी तरह से बंद रहे।
ऐसे में स्कूली वाहनों का संचालन भी नहीं किया जा सका। सभी जगह ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गई। ऐसे में स्कूली वाहन संचालक अभिभावकों से बच्चों को वाहन सुविधा दिए जाने की फीस नहीं वसूल सके। लेकिन परिवहन विभाग ने स्कूली वाहन संचालकों से हर त्रैमासिक वसूला जाने वाले टैक्स में कोई छूट प्रदान नहीं की। एक तरफ कमाई न होने और दूसरी तरफ टैक्स और उस पर बढ़ती पेनाल्टी के चलते अधिकांश स्कूली वाहन मालिक ने अपने परमिट सरेंडर कर दिए।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राजधानी में तकरीबन 800 से अधिक वाहन संचालकों ने अपने परमिट निरस्त करा दिए। वाहन बेच कर इन लोगों ने बकाया टैक्स जमा किया। स्कूली वाहन मालिक और संचालक एसोसिएशन के अध्यक्ष अवतार सिंह ने बताया कि हम लोगों ने टैक्स में छूट दिए जाने की मांग परिवहन आयुक्त से लेकर परिवहन मंत्री तक से की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
अब सभी स्कूल खुल चुके हैं और बच्चे स्कूल भी जा रहे हैं। जल्द ही स्कूली वाहनों की संख्या फिर से बढ़ जाएगी। कोरोना संक्रमण के दौरान यह वाहन नहीं चले। कई स्कूली वाहन संचालकों ने परमिट सरेंडर भी किए हैं…एके द्विवेदी, एआरटीओ प्रशासन, लखनऊ।
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