हल्द्वानी: अलविदा-अलविदा माहे रमजान अलविदा, अल्लाह की इबादत में झुके हजारों सिर… देखें VIDEO
हल्द्वानी, अमृत विचार। माह-ए-रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा की नमाज अदा की गई। हल्द्वानी की जामा मस्जिद समेत वारसीनगर, चिरागअली शाह, जलाल बाबा, आस्थाना, बड़ी मस्जिद और काठगोदाम जामा मस्जिद में अल्लाह की इबादत में हजारों रोजेदारों के सिर झुके। सफेद लिबास, सिर पर टोपी और लबों पर अल्लाह का जिक्र करते रोजेदारों ने …
हल्द्वानी, अमृत विचार। माह-ए-रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा की नमाज अदा की गई। हल्द्वानी की जामा मस्जिद समेत वारसीनगर, चिरागअली शाह, जलाल बाबा, आस्थाना, बड़ी मस्जिद और काठगोदाम जामा मस्जिद में अल्लाह की इबादत में हजारों रोजेदारों के सिर झुके। सफेद लिबास, सिर पर टोपी और लबों पर अल्लाह का जिक्र करते रोजेदारों ने मुल्क की बेहतरी और अमन चैन के लिए दुआ मांगी।

अलविदा की नमाज के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। शहर के बाजार क्षेत्र में स्थित करीब 180 साल पुरानी जामा मस्जिद में भी बड़ी संख्या में रोजेदार इबादत को इकट्ठा हुए। मस्जिद के अंदर जगह कम पड़ने के बाद रोजेदारों ने सड़क पर नमाज अदा की। इस दौरान पुलिस ने बेरिकेडिंग लगाकर रास्तों को बंद कर दिया।
देखें वीडियो: अल्लाह की इबादत में झुके हजारों सिर
कोरोनाकाल के चलते दो साल बाद मस्जिदों में इकट्ठा होकर नमाज अदा करने की खुशी साफ देखी गई। माना जाता है कि अलविदा की नमाज में साफ दिल से जो भी दुआ की जाती है वह जरुर पूरी होती है। बताते चलें कि रमजान के अलविदा जुमा पर अल्लाह की इबादत में नमाज पढ़ना बेहद खास होता है। माना जाता है कि अलविदा जुमा पर नमाज पढ़ने वालों की अल्लाह हर कामना पूरी करते हैं। इसके बाद ईद का पर्व मनाया जाएगा। इसी कारण अलविदा जुमा पर रोजा रखने व न रखने वाले मस्जिदों में नमाज पढ़ते हैं।
रमजान का आखिरी जुमा कई मायनों में खास होता है। एक तो इसके आने का मतलब यह है कि अब बस ईद आने ही वाली है। यानी ईद के चांद से पहले का यह आखिरी जुमा है। अलविदा की नमाज हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है। इस दिन कुछ मुसलमान नए कपड़े पहन कर अपने रब की इबादत करते हैं। अलविदा को छोटी ईद भी कहते हैं। खुद अल्लाह ने पवित्र कुरआन शरीफ में इस दिन को मुसलमानों के लिए खास फरमाया है।
अलविदा जुमा की नमाज दुनिया के हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है। इस दिन लोग रब की इबादत में अपना ज्यादा समय बिताते हैं। कहा जाता है कि अलविदा जुम्मा की नमाज के बाद सच्चे दिल से अगर अल्लाह से कोई फरियाद की जाए तो अल्लाह बंदे की हर जायद दुआ कुबूल करते हैं और उनके गुनाहों को माफ करते हैं। इस दिन मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और इस बात का शुक्र अदा करते हैं कि उन्हें माहे रमजान के पाक महीने में रोजे रखने का मौका मिला। तरावीह पढ़ने और अल्लाह की इबादत करने का सम्मान हासिल हुआ।
