हल्द्वानी: सूखे खेतों ने बढ़ाई अन्नदाता की परेशानी, जाने कब होगी सिस्टम और मौसम की मेहरबानी?

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। गर्मी बढ़ने के साथ ही हल्द्वानी की लाइफलाइन गौला नदी का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। ऐसे में हल्द्वानी, गौलापार और लालकुआं तक खेतों की सिंचाई मुश्किल हो गई है। टेल के इलाकों में सिंचाई नहीं होने से खेत सूख रहे हैं। भीषण गर्मी पड़ने से लौकी, करेला, मूली, बैगन, …

हल्द्वानी, अमृत विचार। गर्मी बढ़ने के साथ ही हल्द्वानी की लाइफलाइन गौला नदी का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। ऐसे में हल्द्वानी, गौलापार और लालकुआं तक खेतों की सिंचाई मुश्किल हो गई है। टेल के इलाकों में सिंचाई नहीं होने से खेत सूख रहे हैं। भीषण गर्मी पड़ने से लौकी, करेला, मूली, बैगन, खीरा, गाजर, शिमला मिर्च, ककड़ी, टमाटर के पौध सूख गए हैं। साथ हीं पर्याप्त सिंचाई न होने से पशुओं के लिए चारे, बरसीम की खेती भी प्रभावित हुई है। फसलों के प्रभावित होने से किसान भी परेशान हैं।

बताते चलें कि आठ महीने पहले आई आपदा के दौरान भी क्षेत्र की कई सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हुई थीं, जो अभी तक सुधारी नहीं जा सकी हैं। ऐसे में रहा सहा पानी भी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अमृत विचार की टीम ने जब गौलापार क्षेत्र के किसानों ने बात की तो उन्होंने सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध न होने पर अपनी पीड़ा को खुलकर बयां किया। किसानों ने पेयजल संकट पर चिंता जताते हुए भविष्य के लिए आगाह भी किया।

किसानों ने बताया कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न होने से इन दिनों आम और लीची की बागवानी भी प्रभावित हुई है। आंधी-तूफान में फल जमीन पर गिर जा रहा है। ऐसे में कच्चे आम को बेचकर किसी तरह रोजी रोटी कमा रहे हैं। ऐसा ही हाल दूसरी फसलों का भी है जो खेतों में सूखने के कगार पर हैं।

बताते चलें कि गौला नदी के पानी पर हल्द्वानी की जलापूर्ति के साथ ही कालाढूंगी रोड पर लामाचौड़ तक, गौलापार क्षेत्र, बरेली रोड पर लालकुआं तक और रामपुर रोड पर बेलबाबा तक की भूमि की सिंचाई निर्भर है। सिंचाई विभाग के सूत्रों के मुताबिक, गर्मियों की शुरुआत से ही गौलापार, लामाचौड़, लालकुआं और रामपुर रोड की नहरों में रोस्टर के हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है।

वहीं, पानी कम रहने से यह टेल के इलाकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे टेल के इलाकों में सिंचाई व्यवस्था ठप है। सूत्र बताते हैं कि सभी नहरों को सुचारू रूप से चलाने के लिए 200 क्यूसेक से अधिक पानी की जरूरत होती है। ऐसे में इन दिनों गौला नदी का जलस्तर कम होने और क्षतिग्रस्त नहरों की वजह से अन्नदाता भी परेशान हैं।

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