बरेली: नहरों की टेल तक पानी पहुंचाने का दावा फेल

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बरेली, अमृत विचार। गेहूं कट गए और बुवाई में पानी नहीं मिला अब धान लगाने की तैयारी है। कई किसानों ने खेतों में गन्ना लगा दिया है। खेतों में पानी की जरूरत है लेकिन खेतों को नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है। यह हाल तब है जब खेत नहर से सटे हैं। किसान …

बरेली, अमृत विचार। गेहूं कट गए और बुवाई में पानी नहीं मिला अब धान लगाने की तैयारी है। कई किसानों ने खेतों में गन्ना लगा दिया है। खेतों में पानी की जरूरत है लेकिन खेतों को नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है। यह हाल तब है जब खेत नहर से सटे हैं। किसान महंगे डीजल से खेतों में पानी लगाने को मजबूर है और सरकार दावा कर रही है कि हर किसान को नहर से पानी मिलेगा। नहरों की टेल तक पानी पहुंचाया जाएगा। अफसर कह रहे हैं कि पानी की कमी है।

रुहेलखंड नहर खंड की नहरों में से एक ही बात करें तो स्थिति सरकार के दावों के बिलकुल उलटी है। शहर से लगभग 14 किमी दूर भोजीपुरा में इंजीनियरिंग कॉलेज के पास घंघोरा घंघौरी गांव में नहर की टेल है। इस नहर की टेल में जरूरत पर कभी पानी नहीं पहुंचता है। टेल से ऊपर बढ़ने पर भी नहर सूखी ही मिलती है।

गांव के किसान बताते हैं कि सैय्यदपुर से आ रही नहर मझौआ गांव से मुड़कर लखमपुर, प्रहलादपुर की ओर मुड़कर घंघौरा घंघौरी गांव की तरफ जाती है। यहीं नहर की टेल भी है। कागजों में आसपास के गांवों की हजारों बीघा जमीन को सींच रही इस नहर में पानी नहीं आता है, जबकि सिल्ट सफाई के नाम पर इस नहर की सफाई अफसर जरूर कराते हैं।

भाजपा की कल्याण सिंह सरकार के समय इस नहर को आदर्श नहर के रूप में नहर खंड ने विकसित किया था। उस समय तो पानी आया लेकिन उसके बाद से इस नहर में पानी नहीं आया है। वर्ष 2016 में शिकायत करने पर विभाग ने लकड़ी के पटरे लगवाकर टेल तक पानी पहुंचवाया था। इससे किसानों को डीजल लेकर पानी नहीं लगाना पड़ा था। उत्पादन लागत भी कम आई।

सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह दावा करते हैं कि नहरों की टेल तक हर किसान को पानी पहुंचाया जाएगा लेकिन रुहेलखंड नहर खंड में टेल के बीच के खेतों में भी नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है। नहर सूखी पड़ी हैं। सफाई होने के बाद इसमें फिर से झाड़ियां उग आई हैं। नहर में पानी का इंतजार करते करते अब यहां के किसानों ने भी सरकार के दावों पर भरोसा छोड़कर डीजल खरीदकर खेतों में पानी लगाना शुरु कर दिया है। गन्ने लगे खेत में किसान पानी लगाने लगे हैं। धान लगाने के लिए खेतों का पलेवा भी कई किसानों ने कर लिया है।

सभी नहरों में पानी बराबर छोड़ा जाता है। नदियों में जलस्तर कम होने के कारण पानी कम मिल रहा है। जितना पानी मिल रहा है उसे बिना भेदभाव के नहरों में छोड़ा जा रहा हैमुकेश कुमार, अधिशासी अभियंता ,रुहेलखंड नहर खंड।

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