हल्द्वानी: सावधान! कहीं आपके पालतू को तो नहीं हो रहा कैनल कफ, डर्मेटाइटिस और पार्वो
हल्द्वानी, अमृत विचार। इन दिनों हल्द्वानी पशु चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले पालतू कुत्तों में सबसे ज्यादा संक्रमण पाया जा रहा है तो वह है कैनल कफ का, चिकित्सकों की मानें तो यह रोग काफी तेजी से फैलता है जो कि एक बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। प्रतिदिन तीन से पांच केस …
हल्द्वानी, अमृत विचार। इन दिनों हल्द्वानी पशु चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले पालतू कुत्तों में सबसे ज्यादा संक्रमण पाया जा रहा है तो वह है कैनल कफ का, चिकित्सकों की मानें तो यह रोग काफी तेजी से फैलता है जो कि एक बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। प्रतिदिन तीन से पांच केस तक इस रोग के आ रहे हैं। इस रोग के लक्षणों में कुत्ते को खांसी होती है जो कि एक बैक्टीरिया के चलते होती है, इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी होता है।
वहीं शहर में पार्वो और डर्मेटाइटिस के केस भी सामने आ रहे हैं हालांकि सबसे ज्यादा केस कैनल कफ के ही हैं। शहर के पशु चिकित्सालय में तैनात चिकित्सक डा.आर के पाठक का कहना है कि कैनल कफ के बाद डर्मेटाइटिस और पार्वो से ग्रसित केस भी सामने आ रहे हैं हालांकि हालात अभी उतने चिंताजनक नहीं हैं। लोगों को चाहिए कि वह समय से अपने पालतू जानवरों का टीकाकरण करवाएं ताकि वह संक्रमण से बचा रहे।
इन उपायों को होगा अपनाना
– पालतू जानवर (पेट्स) को बाहर घुमाने ले लाते वक्त पेट्स मास्क का इस्तेमाल करें।
– पेट्स मास्क का इस्तेमाल करने से आपका डॉगी ऐसी चीजों के संपर्क में आने से बच जाएगा, जो उसे बीमार कर सकती हैं।
– पेट्स को बाहर से घुमाकर घर पर लाएं तो हल्के गुनगुने पानी से उनके पैरों को साफ कर लें।
– अपने पालतू जानवर को खाना देने या छूने के बाद हाथ को साबुन से धोएं या सैनेटाइज करें।
– किलनी या पिस्सू होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर उचित दवा लिखवा सकते हैं।
– गर्मी से बचाना होगा नहीं तो हीट स्ट्रेस होगा, जितना हो सके उनके लिए पीने के लिए शुद्ध पानी और बैठने की जगह पर हवा आदि का प्रबंध करना होगा।
– जितना हो सके अपने पालतू कुत्ते का वैक्सिनेशन कराकर उन्हें बीमारी से बचाया जा सकता है। बीमारी का असर कुत्तों की किडनी, लिवर इत्यादि पर होता है, जबकि कुछ दिन में इसके वायरस मस्तिष्क तंत्रिका में पहुंच जाते हैं और कुत्तों की मौत हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि वैक्सीनेशन करवाने के बाद हर वर्ष बूस्टर डोज लगवाना भी जरूरी है।
