हल्द्वानी: मानसूनी आफत से बचने को खींचा जा रहा खाका, डीआईजी ने हर जिले से मांगी रिपोर्ट

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हल्द्वानी, अमृत विचार। मानसून आ चुका है और मानसूनी आफत किसी भी वक्त आ सकती है। इसको लेकर कुमाऊं में जिलेवार तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। कुमाऊं के अत्यधिक जल भराव वाले मैदानी इलाकों में राहत कार्य के लिए नाव का इस्तेमाल किया जाएगा और पहाड़ पर रास्ते साफ करने के लिए जेसीबी का …

हल्द्वानी, अमृत विचार। मानसून आ चुका है और मानसूनी आफत किसी भी वक्त आ सकती है। इसको लेकर कुमाऊं में जिलेवार तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। कुमाऊं के अत्यधिक जल भराव वाले मैदानी इलाकों में राहत कार्य के लिए नाव का इस्तेमाल किया जाएगा और पहाड़ पर रास्ते साफ करने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया जाएगा।

डीआईजी निलेश आनंद भरणे ने लोगों को मानसूनी आफत से बचाने के लिए कुमाऊं के सभी एसएसपी से रिपोर्ट मांगी है। डीआईजी ने बताया कि ऊधमसिंहनगर में बाढ़ और जल भराव की वजह से तमाम बस्तियों में लोग फंस जाते हैं। जबकि पहाड़ पर स्थित इसके ठीक उलट होती है। पहाड़ पर भू-स्खलन से रास्ते बंद हो जाते हैं। ऐसे में कई-कई दिनों तक रास्ते बंद हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिलेवार ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां भू-स्खलन होता है। ऐसे स्थानों पर जेसीबी तैनात की जाएगी और इन्हें जीपीएस से लैस किया जाएगा। ताकि जेसीबी की लोकेशन का हर वक्त पता रहे और जरूरत के वक्त उसे दूसरे स्थान पर भी भेजा जा सके। डीआईजी ने बताया कि आपदा की नजर से हर जिले की स्थिति भिन्न है और उसी हिसाब से जिलेवार समस्याओं से निपटा जाएगा।

दो जिलों के ये इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील

नैनीताल : इस जिले में भू-स्खलन और पेड़ गिरने की समस्या सबसे ज्यादा है और इस लिहाज से मुक्तेश्वर, रामगढ़, गरमपानी, खैरना और बेतालघाट सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं।

ऊधमसिंहनगर : इस जिले में बाढ़ और जल भराव की समस्या सबसे बड़ी है। तमाम इलाके हर साल इस समस्या से जूझते हैं और
झनकइया, खटीमा, सितारगंज, रम्पुरा, ट्रांजिट कैंप, बाजपुर और आईटीआई इस लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं।

डिजास्टर मिटीगेशन फंड से मिलेगी मदद

डीआईजी निलेश आनंद भरणे ने बताया कि इन सब कामों के लिए एक बड़े फंड की जरूरत पड़ेगी और इसके लिए हमें डिजास्टर मिटीगेशन फंड से मदद मिलेगी। इसमें दो करोड़ से ज्यादा का खर्च है, लेकिन इस खर्च में मोटर बोट का खर्च शामिल नहीं है। मोटर बोट के लिए एसडीआरएफ से डिमांग की जाएगी।

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