बारिश करवाने ‘बादल के बीज’ बो रहा चीन, 60 साल में सबसे भयानक गर्मी, नदियां सूखीं…बिजली गुल

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बीजिंग। दूसरों को अपने कर्ज के जाल में फंसाने वाला चीन इस वक्त खुद कई तरह के संकटों में घिरा हुआ है। चीन इस वक्त भयानक गर्मी का सामना कर रहा है जिसकी वजह से इसके कुछ हिस्सों में नदियां सूख गई हैं। बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है जिससे …

बीजिंग। दूसरों को अपने कर्ज के जाल में फंसाने वाला चीन इस वक्त खुद कई तरह के संकटों में घिरा हुआ है। चीन इस वक्त भयानक गर्मी का सामना कर रहा है जिसकी वजह से इसके कुछ हिस्सों में नदियां सूख गई हैं। बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है जिससे मुख्य रूप से फैक्ट्रियां बाधित हो रही हैं।

फसलों की पैदावार घटने से देश का आर्थिक संकट और अधिक गहरा सकता है। चीन के कई हिस्से पिछले 60 साल की सबसे प्रचंड गर्मी का सामना कर रहे हैं। सरकारी मौसम एजेंसियों की मानें तो देश के मध्य और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में कई जगहों पर अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियम से अधिक दर्ज किया गया। एजेसियों ने भविष्यवाणी की है कि दक्षिण में उच्च तापमान और दो हफ्तों तक लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है।

चीन के कई प्रांत इन दिनों भयानक सूखे से जूझ रहे हैं, जो लगातार चीन की अर्थव्यवस्था पर वार कर रहा है। चीन की कई नदियां सूखे के कगार पर हैं, लिहाजा इन दिनों चीन आसमान में बादल के बीज बो रहा है, ताकि बारिश हो और नदियों में पानी आए। चीन के विमान प्रसिद्ध चीनी नदी यांग्त्ज़ी में पानी भरने के लिए आकाश में बादल के बीज के गोले दाग रहे हैं, ताकि सूखे के संकट से पार पाया जाए।

चीन इन दिनों रिकॉर्ड गर्मी के संकट से जूझ रहा है, जिसकी वजह से लाखों लोगों के लिए जीवनदायिनी यांग्त्ज़ी नदी का एक बड़ा हिस्सा सूख चुका है, लिहाजा चीन की कोशिश है, कि बादल के बीज बोया जाए, ताकि बारिश हो और यांग्त्ज़ी में पानी भरे।

चीनी विमान अपनी महत्वपूर्ण यांग्त्ज़ी नदी में अधिक वर्षा करवाने के लिए आकाश में बादल के बीज के गोले दाग रहे हैं और यांग्त्ज़ी नदी के कई क्षेत्रों ने मौसम संशोधन कार्यक्रम शुरू किए हैं, लेकिन, चीन की लाख कोशिशों के बाद भी बहुत कम बादलों का निर्माण हो रहा है, लिहाजा बारिश नहीं हो पा रही है।

China warned that severe drought conditions along the Yangtze river could last well into September

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने बुधवार को एक नोटिस में कहा कि, यांग्त्ज़ी नदी बेसिन में सूखा “ग्रामीण लोगों और पशुओं की पेयजल सुरक्षा और फसलों की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।” वहीं, बुधवार को चीन के एक और हुबेई प्रांत ने घोषणा की है, कि वो आसमान में बादलों की बुआई करेगा, ताकि बारिश करवाई जाए और इसके लिए वो सिल्वर आयोडाइड की छड़ का उपयोग करेगा।

सिल्वर आयोडाइड की छड़ें, जो आमतौर पर सिगरेट के आकार की होती हैं, उसे पानी के क्रिस्टल बनाने में मदद करने के लिए आसमान में मौजूद बादलों में शूट किया जाता है। जिसकी वजह से क्रिस्टल का निर्माण होता है, जिससे इसकी नमी की मात्रा भारी हो जाती है और ये क्रिस्टल तब बादल को अधिक बारिश पैदा करने में मदद करते हैं और बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।

क्लाउड सीडिंग 1940 के दशक से चलन में है और कृत्रिम बारिश करवाने के लिए चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम बनाकर रखा है। इसने आयोजन के लिए शुष्क मौसम सुनिश्चित करने के लिए 2008 में बीजिंग ओलंपिक से पहले सीडिंग का इस्तेमाल किया था और इस तकनीक का इस्तेमाल बर्फबारी को प्रेरित करने या ओलों को नरम करने के लिए भी किया जा सकता है।

हालांकि, इस बार चीन को कृत्रिम बारिश करवाने में ज्यादा मदद नहीं मिल रही है। हुबेई के प्रांतीय आपातकालीन प्रबंधन विभाग ने मंगलवार को कहा कि, जून के बाद से हुबेई में कम से कम 42 लाख लोग भीषण सूखे से प्रभावित हुए हैं।

चीन की यांग्त्ज़ी नदी भी उत्तरी गोलार्ध में स्थिति है और ये नदी भी अमेरिका में मौजूद लेक मीड, जर्मनी की राइन नदी की तरह ही लगातार सूखती जा रही है और इन क्षेत्रों में काफी कम बारिश होने लगी है, जिससे नदी में पानी जमा नहीं हो पा रहा है और ये नदियां लगातार सिकुड़ती जा रहीं हैं।

हालांकि, चीन अपनी नदियों को बचाने के लिए फंड तो बना रहा है, लेकिन चीन में औद्योगिकीकरण की वजह से भारी संख्या में जंगल काटे गये हैं और कोयले का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया जा रहा है, लिहाजा एक्सपर्ट्स का कहना है, कि आप प्रकृति को पैसों से नहीं खरीद सकते हैं। स्थिति ये बन गई है, कि हुबेई प्रांत के लाखों पशुओं की जिंदगी बचाने के लिए दूसरे प्रांतों में भेजा जा रहा है और चीन की सरकार ने इस काम के लिए और आपदा राहत के लिए करीब 44.30 मिलियन डॉलर दिए हैं।

वहीं, चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने मंगलवार को कहा है कि, डाउनस्ट्रीम आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए चीन की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, थ्री गोरजेस बांध से अगले 10 दिनों में करीब 500 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा जाएगा, ताकि नदी में पानी की वृद्धि हो। दरअसल, चीन ने रॉकेट की रफ्तार से बांधों का निर्माण किया है और अपनी नदियों को हजारों जगहों पर बांध दिया है और नदियों के सूखने की ये भी एक बड़ी वजह है।

हैरानी की बात ये है, कि चीन अभी भी थम नहीं रहा है और आने वाले सालों में सैकड़ों बांधों का और निर्माण किया जाएगा। वहीं, भीषण गर्मी ने दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन में भी अधिकारियों को परेशान कर दिया है और करीब साढ़े आठ करोड़ की आबादी वाले इस राज्य में सभी फैक्ट्रियों को अगले 6 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि घरों में बिजली की सप्लाई की जा सके। सिचुआन प्रांत चीन का एक प्रमुख मैन्यूफैक्चरिंग प्रांत है, लिहाजा इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने की संभावना है।

Water levels in the Yangtze River that flows through Southwest China’s Chongqing Municipality have declined due to a prolonged drought, revealing parts of the river bed, on August 17, 2022. Photo: VCG

चीन के मौसम विज्ञान प्रशासन ने कहा कि, चीन ने बुधवार को देश भर के कम से कम 138 शहरों और काउंटी के लिए अपनी उच्चतम रेड अलर्ट गर्मी की चेतावनी जारी की, और अन्य 373 को दूसरे उच्चतम नारंगी अलर्ट के तहत रखा गया। नेशनल क्लाइमेट सेंटर ने एक बयान में कहा कि, पिछले 64 दिनों से चीन में इस तरह की भीषण गर्मी और लू की लहर चल रही है, जो अभी तक का एक रिकॉर्ड है और पिछले 60 सालों में ऐसा नहीं हुआ था, जब से चीन में गर्मी को मापा जाने लहा।

वहीं, मौसम विभाग ने ये चेतावनी भी जारी की है, कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयानक हो सकती है। चीन के मौसम विभाग ने अपने नागरिकों को घर से कम से कम निकलने की सलाह देते हुए कहा है कि, इस बार गर्मी की लहर लंबी, व्यापक और चरम सीमा तक मजबूत है। और सभी संकेतों से यही पता चल रहा है, कि आगे गर्मी की लहर और भी ज्यादा बढ़ेगी।

A view of Yichang section of the Yangtze River.Photo: IC

बयान के अनुसार, रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से गर्मी की लहर ने 40 डिग्री सेल्सियस से लगातार ज्यादा रहती है और कई शहरों में सुबह के वक्त ही 44 डिग्री से ज्यादा का पारा रहता है और दोपहर में ये 50 को छू जाता है।

भीषण गर्मी की वजह से लोगों ने एसी का इस्तेमाल काफी ज्यादा शुरू कर दिया है, लिहाजा बिजली की डिमांड भी काफी ज्यादा बढ़ गई है और चीन में अभी तक 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है, जिसकी वजह से जमीन का जलस्तर भी कम हो रहा है।

वहीं, बिजली बचाने के लिए रात में शहरों में स्ट्रीट लाइट बंद करने के निर्देश दिए गये हैं, वहीं, हाइड्रोपॉवर प्लांट में भी पानी की कमी की वजह से कम बिजली का उत्पादन हो रहा है। खासकर सिचुआन शहर सेमीकंडक्टर उत्पादन और सोलर पैनल के निर्माण के लिए जाना जाता है और अगले एक हफ्ते कर प्रोडक्शन बंद होने का असर कई क्षेत्रों में पड़ने की संभावना है।

 

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