RBI Monetary Policy: रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा, महंगा होगा लोन, EMI पर भी पड़ेगा असर
मुंबई। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि नीतिगत रेपो दर को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.9% किया गया है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि उम्मीद से कम रही, फिर भी यह 13.5% थी …
मुंबई। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि नीतिगत रेपो दर को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.9% किया गया है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि उम्मीद से कम रही, फिर भी यह 13.5% थी और शायद प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक थी।
शक्तिकांत दास ने कहा कि हम कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के नीतिगत दर में आक्रामक वृद्धि से नये ‘तूफान’ का सामना कर रहे हैं। दास ने कहा, वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति छह प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। मुद्रास्फीति की ऊंची दर को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति का सूझ-बूझ के साथ मौद्रिक नीति को लेकर उदार रुख को वापस लेने के रुख पर कायम रहने का निर्णय लिया गया है। मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से पांच ने नीतिगत दर में वृद्धि का समर्थन किया।
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की है। ब्याज दरों में लागातर चौथी बाजार इजाफा हुआ है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार (30 सितंबर 2022) को बाई-मंथली मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान किया। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट बढ़कर 5.90 फीसदी हो गया है. जोकि तीन साल में सबसे ज्यादा है। महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ने एक बार फिर कर्ज महंगा करने का फैसला किया है। मई 2022 से अबतक रिजर्व बैंक रेपो रेट में 190 बेसिस प्वाइंट (1.90 फीसदी) का इजाफा कर चुका है।
मुद्रास्फीति का अनुमान 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा हुए चुनौतीपूर्ण वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपने मुद्रास्फीति के अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिये मुद्रास्फीति अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। दूसरी छमाही में इसके करीब छह प्रतिशत रहने का अनुमान है। दास ने कहा कि तीसरी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 6.5 प्रतिशत और मार्च तिमाही के लिए 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अगर तेल के दाम में मौजूदा नरमी आगे बनी रही, तो महंगाई से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति सात प्रतिशत थी, जो आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ऊपर है। केंद्रीय बैंक को जिम्मेदारी दी गई है कि वह मुद्रास्फीति को 2-6 प्रतिशत के बीच रखे। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई दर पांच फीसदी रहने का अनुमान है।
Statement by Shri Shaktikanta Das, RBI Governor – September 30, 2022 https://t.co/IfwcBLQOXD
— ReserveBankOfIndia (@RBI) September 30, 2022
RBI Monetary Policy
रेपो रेट में 0.50% बढ़ोतरी का ऐलान
रेपो रेट 5.40% से बढ़कर 5.90%
MPC के 6 में से 5 सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में
महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है: RBI
SDF 5.15% से बढ़कर 5.65%: RBI
सभी सेक्टर के लिए महंगाई चिंता का विषय: RBI
महंगे हो जाएंगे लोन
रेपो रेट्स में बढ़ोतरी से कॉस्ट ऑफ बोरोइंग यानी उधारी की लागत बढ़ जाएगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रेपो रेट बढ़ने से बैंकों की बोरोइंग कॉस्ट बढ़ जाएगी। बैंक इसे ग्राहकों पर डालेंगे। इससे लोन लेना महंगा हो जाएगा। इससे मकानों की बिक्री भी प्रभावित होगी। कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी से बिल्डर पहले ही रियल एस्टेट की कीमत बढ़ा चुके हैं। इससे रियल एस्टेट मार्केट की रिकवरी प्रभावित होगी, जो पहले ही धीमी गति से पटरी पर लौट रही है।
बढ़ जाएगी आपकी ईएमआई
अगर किसी व्यक्ति ने अप्रैल 2022 में एक करोड़ रुपये का होम लोन 6.9 फीसदी ब्याज पर 20 साल के लिए ले रखा है, तो उसकी किस्त 76,931 रुपये होगी। लेकिन रेपो रेट में 50 बेसिस अंक की बढ़ोतरी के बाद यह 87,734 रुपये चली जाएगी। होम लोन के अलावा ऑटो लोन, एजुकेशन लोन, पर्सनल लोन और बिजनस लोन भी महंगा हो जाएगा। बोरोइंग कॉस्ट बढ़ने से आम लोग अनावश्यक खर्च से बचते हैं जिससे मांग घटती है। हालांकि, रेपो रेट में बढ़ोतरी का उन ग्राहकों को फायदा होगा, जिन्होंने एफडी करा रखी है।
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