विकास के साथ ही दफन हो गया खादी और खाकी का सच !

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। एक दिन पहले गुरुवार को मध्यप्रदेश के सुप्रसिद्ध महाकाल मंदिर में चिल्ला-चिल्लाकर खुद को विकास दुबे बताने वाले दुर्दांत को पुलिस ने कानपुर में मार गिराया है। कानपुर जोन के आईजी मोहित अग्रवाल बताते हैं कि दुर्दांत अपराधी को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया है। उसे स्ट्रेचर पर लाला लाजपत राय हॉस्पिटल में लाया …

लखनऊ। एक दिन पहले गुरुवार को मध्यप्रदेश के सुप्रसिद्ध महाकाल मंदिर में चिल्ला-चिल्लाकर खुद को विकास दुबे बताने वाले दुर्दांत को पुलिस ने कानपुर में मार गिराया है। कानपुर जोन के आईजी मोहित अग्रवाल बताते हैं कि दुर्दांत अपराधी को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया है। उसे स्ट्रेचर पर लाला लाजपत राय हॉस्पिटल में लाया गया था।

दरअसल विकास दुबे को कानपुर ला रही एसटीएफ के काफिले की गाड़ी आज सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा कानपुर टोल प्लाजा से 25 किलोमीटर दूर हुआ। बताया जा रहा है कि जब गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई, उस समय विकास दुबे हथियार छीनकर भाग निकला। सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने हिसाब से इस पर कह-सुन रहे हैं।

विकास दुबे के पकड़े जाने से कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता था, क्योंकि दुर्दांत अपराधी के संबंध कई बड़े राजनेताओं और पुलिस से था। अब उसके मारे जाने से सारे राज उसके सीने में ही दफन हो गए। लोगों का कहना है कि कानपुर कांड से लेकर उसके सारे सियासी कनेक्शन और पुलिस से नेक्सस का खुलासा हो सकता था, लेकिन अब उसके सारे राजदार सुरक्षित बच निकले।

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा और ट्वीट किया- ‘दरअसल यह कार नहीं पलटी, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गई।’ वहीं संतकबीरनगर के सपा नेता जयराम पांडेय कहते हैं- ‘बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब होने से बच गए, सीआरपीसी सहित कांस्टीट्यूशन की धज्जियां उड़ाई गई।’ वहीं पत्रकार अर्णब गोस्वामी ने ट्वीट किया और कहा कि सबसे ज्यादा राहत की सांस तो समाजवादी पार्टी ने ली होगी। जबकि इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट पर लिख दिया था कि गाड़ी पलटी और विकास दुबे ने भागने की कोशिश की। भागना होता तो सरेंडर काहे करता, राज गहरे हैं।

अखिलेश यादव ने ट्वीट
अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा और ट्वीट किया वहीं वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के तेवर भी तल्ख दिखे। उन्होंने ट्वीट किया- ‘अगर यह कार नहीं पलटी होती तो शायद यूपी की सरकार पलट जाती। कांग्रेसी नेता प्रियंका गांधी ट्वीट करती हैं कि अपराधी का अंत हो गया लेकिन उनके सियासी आकाओं का क्या?

सोशल मीडिया पर युवा उद्यमी मंगल बारीवाल कहते हैं कि विकास दुबे का एनकाउंटर नहीं हुआ, उसकी हत्या हुई है। हां, यह एनकाउंटर है कानून का और इस देश के लोकतंत्र का। व्यवस्था पर शर्म आ रही है। वहीं युवा अधिवक्ता बृजेश चौबे ने सोशल मीडिया पर सवाल किया- क्या विकास दुबे मारा गया या मरवाया गया?

सभी राजनीतिक दलों के साथ थे कनेक्शन
सियासी जानकारों के मुताबिक विकास दुबे 25 साल से सूबे के सभी राजनीतिक दलों के साथ रहा था। वह 15 साल बसपा के साथ रहा तो पांच साल उसने बीजेपी का भी साथ दिया और अब वह पांच साल से सपा में था। पंचायत चुनाव के दौरान उसे बसपा से समर्थन मिला, जबकि उसकी पत्नी को सपा का समर्थन मिला था।

बीएसपी सरकार के दौरान ही विकास दुबे ने बिल्हौर, शिवराजपुर, रनियां, चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में अपना रसूख कायम किया था। इस दौरान शातिर अपराधी ने कई जमीनों पर अवैध कब्जे भी किए। जेल में बंद रहते हुए इस कुख्यात हिस्ट्रीशीटर ने शिवराजपुर से नगर पंचायत चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की थी।

मोस्टवांटेड विकास दुबे को सियासत में लाने का श्रेय पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरिकिशन श्रीवास्तव को है। एक वायरल वीडियो में विकास ने खुद स्वीकार किया था कि मैं अपराधी नहीं हूं, मेरी जंग राजनीतिक वर्चस्व की जंग है और ये मरते दम तक जारी रहेगी।

बताते चलें कि हरिकिशन श्रीवास्तव कानपुर के चौबेपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। वह बसपा सरकार में विधानसभा अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, वे पहली बार विधायक जनता पार्टी से बने और बाद में जनता दल और फिर बसपा का दामन थामा।

साल 1996 में कानपुर की चौबेपुर विधानसभा सीट से हरिकिशन श्रीवास्तव बसपा से चुनाव लड़े। उनके खिलाफ बीजेपी से तत्कालीन जिला अध्यक्ष संतोष शुक्ला खड़े हुए थे। इस चुनाव में हरिकिशन जीत गए लेकिन संतोष को दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बना दिया गया। इसी सियासी रंजिश में 11 नवंबर 2001 को कानपुर के थाना शिवली के अंदर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। संतोष शुक्ला की हत्या में विकास दुबे का नाम आया था, लेकिन वो कोर्ट से बरी हो गया था।

विकास दुबे का क्या है BJP कनेक्शन
गैंगस्टर दुबे का साल 2017 का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में एसटीएफ द्वारा उससे पूछताछ की जा रही थी। वीडियो में विकास ने बताया था कि कैसे एक हत्या में उसका नाम कथित रूप से डाला गया था, जिसे निकलवाने में कुछ नेता उसकी मदद कर रहे थे। वीडियो में गैंगस्टर ने बिल्हौर से बीजेपी विधायक भगवती प्रसाद सागर और बिठूर से बीजेपी विधायक अभिजीत सांगा के नाम का जिक्र किया।

इसके अलावा विकास ने ब्लॉक प्रमुख राजेश कमल, जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डन कटियार के नाम भी लिए थे। विकास ने कहा कि इन नेताओं से उसके राजनीतिक संबंध हैं। बताते चलें कि अभिजीत सांगा पहले कांग्रेस में थे। वहीं, भगवती प्रसाद सागर बसपा से बीजेपी में आए थे। बिल्हौर विधानसभा से विधायक भगवती प्रसाद सागर 2017 में ही भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं अभिजीत सांगा भी 2017 में ही बीजेपी में आए और बिठुर से विधायक बने हैं।

वहीं राजधानी दिल्ली में विकास दुबे को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई थी। याचिकाकर्ता वकील घनश्याम उपाध्याय का कहना है कि वो आज सुनवाई की मांग करेंगे। कल दाखिल याचिका में विकास को एनकाउंटर से बचाने की मांग की गई थी। उसके घर, मॉल को ढहाने के मामले में एफआईआर दर्ज करने, पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की भी मांग की गई है।

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