उत्तराखंड: लापता सभी चारों ट्रेकर सुरक्षित, सोनप्रयाग लाए गए

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देहरादून। उत्तराखंड स्थित ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम के दर्शन करने के बाद ट्रेकिंग पर निकले लापता सभी चार ट्रेकर्स को राज्य की देवदूत कहे जाने वाले राज्य आपदा परिचालन बल (एसडीआरएफ) ने उन्हें सुरक्षित खोजने के बाद शुक्रवार को सोनप्रयाग ले आयी। ये चारों ट्रेकर रविवार शाम से लापता थे। एसडीआरएफ की पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट …

देहरादून। उत्तराखंड स्थित ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम के दर्शन करने के बाद ट्रेकिंग पर निकले लापता सभी चार ट्रेकर्स को राज्य की देवदूत कहे जाने वाले राज्य आपदा परिचालन बल (एसडीआरएफ) ने उन्हें सुरक्षित खोजने के बाद शुक्रवार को सोनप्रयाग ले आयी।

ये चारों ट्रेकर रविवार शाम से लापता थे। एसडीआरएफ की पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने बताया कि 12 जुलाई को केदारनाथ यात्रा के लिये पहुँचे देहरादून निवासी चार पर्यटक केदारधाम के दर्शन उपरांत वासुकिताल -त्रियुगी नारायण होते हुए सोनप्रयाग तक ट्रेकिंग पर निकल गये। उन्होंने अपने एक साथी को यह कहते हुए भेज दिया कि हम चारों सोमवार को सोनप्रयाग में मिलेंगे।

चारों साथियों के देर रात्रि तक सोनप्रयाग न पहुंचने पर उनके साथी शशांक ने सोनप्रयाग पुलिस को इसकी जानकारी दी। लापता पर्यटकों का पता ना चलने पर 14 जुलाई को एसडीआरएफ को उन्हें खोजने के लिये कहा गया। सुश्री भट्ट ने बताया कि सूचना मिलते ही केदारनाथ से उनकी एक तलाश टीम वासुकीताल क्षेत्र को रवाना हुई। अत्यधिक खराब मौसम में उनकी तलाश के बावजूद कोई सफलता हाथ नहीं लग पायी।

इसके बाद बुधवार को हवाई (हेली) खोज के साथ चार अलग-अलग एसडीआरएफ टीमों ने उनकी तलाश शुरू की। उन्होंने बताया कि उच्च तुंगता क्षेत्रों में मौसम अत्यधिक खराब होने एवम कुहरा होने की वजह से हेली के माध्यम से उन्हें ढूंढने में सफलता नहीं मिली, किन्तु धरातल की टीमों का तलाश अभियान जारी रहा।

एसपी ने बताया कि कल लापता चारों ट्रेकरों देहरादून निवासी हिमांशु गुरुंग और जितेंद्र भण्डारी एवमं नैनीताल निवासी मोहित भट्ट और जगदीश बिष्ट की लोकेशन अथक प्रयासों के बाद तोशी गांव के करीब मिली। टीम ने सभी को तोशी के जंगलों में खोजकर, वहीं गाँव में रात्रि विश्राम कराया और आज सुबह टीम ट्रेकर्स सहित सोनप्रयाग पहुंची।

उन्होंने बताया कि सभी ट्रेकर्स बेहद थके हुए थे जिनके द्वारा रातें खुले आसमान और चट्टानों की आड़ में ठंड में गुजारी थी। उन्होंने बताया कि सम्पूर्ण अभियान में एसडीआरएफ के साथ जिला पुलिस एवमं डीडीआरएफ की टीमों का भी सहयोग रहा।

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