रानीखेत: कुमाऊं के पौराणिक धामों की यात्रा शुरू कराने की मांग

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रानीखेत, अमृत विचार। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं छावनी परिषद के नामित सदस्य मोहन नेगी ने बद्रीनाथ धाम में भारी भीड़ के कारण हुई अव्यवस्था और इसके चलते पर्यटकों की दिक्कतें देखते हुए तीर्थयात्रियों की भीड़ को कुमाऊं के आठवीं सदी के पौराणिक तीर्थ स्थलों की तरफ मोड़ने के लिए आवश्यक नीति बनाए जाने की …

रानीखेत, अमृत विचार। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं छावनी परिषद के नामित सदस्य मोहन नेगी ने बद्रीनाथ धाम में भारी भीड़ के कारण हुई अव्यवस्था और इसके चलते पर्यटकों की दिक्कतें देखते हुए तीर्थयात्रियों की भीड़ को कुमाऊं के आठवीं सदी के पौराणिक तीर्थ स्थलों की तरफ मोड़ने के लिए आवश्यक नीति बनाए जाने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि जागेश्वर धाम, हाट कालिका और पाताल भुवनेश्वर मंदिर आठवीं सदी के मंदिर है। जिन्हें आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया था। इसके अतिरिक्त डोल आश्रम कनरा को भी धाम की मान्यता देने की प्रक्रिया जारी है। सरकार ने उपरोक्त तीनों धामों को मानस माला मंदिर के अंतर्गत शामिल कर लिया है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री भी उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के जरिए पर्यटन बढ़ाने पर जोर दे चुके हैं। मोहन नेगी ने आग्रह किया है 2023 यात्रा सीजन में तीर्थयात्रियों की भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए उन्हें कुमाऊं के चारों धामों की ओर आकर्षित करने की योजना पर अभी से कार्य किया जाना चाहिए। जिससे कुमाऊं में रोजगार सृजन हो और पलायन भी रुक सके।

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