अयोध्या विकास प्राधिकरण की लूट व शहर का अनियोजित विकास डेंगू का अहम कारण
अमृत विचार, अयोध्या। अयोध्या विकास प्राधिकरण की मूंदौ आंख कतहु कछु नाहीं नीति के चलते आज शहर डेंगू के डंक से थर-थर कांप रहा है। प्राधिकरण और भूमाफिया के गठजोड़ का ही नतीजा है कि दोनों शहरों में लगभग 50 अनियोजित कॉलोनियां खड़ी हो गईं। इन्हीं कॉलोनियों में सबसे अधिक जलभराव की समस्या सामने आती है। अनियोजित बसीं कॉलोनियों में प्राधिकरण ने कहीं भी ड्रेनेज सिस्टम डेवलप ही नहीं किया, जिसका खामियाजा आज शहर भुगत रहा है।
बता दें कि प्राधिकरण का गठन ही इसीलिए किया गया था कि नगर को नियोजित ढंग से बसाया जाए, जिसमें कॉलोनियां, पार्क, पार्किंग समेत कांपलेक्स आदि शामिल होते हैं, लेकिन यहां हुआ इसके बिल्कुल उल्टा। प्राधिकरण शहर को नियोजित ढंग से बसाने की जिम्मेदारी ताक पर रख कर लोगों को जहां तहां बसने की छूट दे दी नतीजा आज अधिकतर इलाकों में बिना लेआउट के आवास ही नहीं शापिंग काम्प्लेक्स और होटल, मार्केट तक बन गई है। हाल यह है कि बिना प्रापर लेआउट और नक्शे के नाले - नालियों पर कब्जा कर निर्माण करा लिए गए हैं।
न प्राधिकरण के कारिंदों ने ड्रेनेज सिस्टम का ध्यान रखा न निर्माण कराने वालों ने। सिविल लाइन में बीते तीन सालों में बड़े बड़े भवन और मार्केट बन कर खड़े हो गए, जहां जल निकासी तक का सिस्टम नहीं है। रिकाबगंज से लेकर हनुमानगढ़ी और नियावां इलाके तक में अनियोजित ढंग से कॉलोनियां बस गर्इं, जिन्हें कोई पूछने वाला नहीं। प्राधिकरण ने भी बिना मौका मुआयना किए जेब गर्म कर धड़ाधड़ नक्शे पास किए, अवर अभियंताओं की फौज मौज काटती रही।
नतीजा आज आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हाल यह है कि प्राधिकरण द्वारा विकसित खुद की कालोनियों तक में ड्रेनेज सिस्टम का इंतजाम नहीं हैं। 26 फरवरी 96 को अयोध्या विशेष क्षेत्र को विघटित किया गया उसके बाद से प्राधिकरण और भू-माफिया का खेल और तेज चला। लोगों का कहना है कि शहर के नियोजित विकास पर ध्यान दिया गया होता तो वर्तमान में तमाम विसंगतियों का सामना न करना पड़ता।
वर्तमान में भी जारी है प्राधिकरण व भू-माफिया का खेल
अयोध्या विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और भू-माफिया का खेल अभी भी जारी है। बिना लेआउट और नक्शा पास के निर्माण कई क्षेत्रों में चल रहा है। इसकी निगरानी के लिए गठित अवर अभियंताओं की पूरी टीम काकस के जरिए वसूली में जुटी हुई है।
