हल्द्वानी: आयुर्वेदिक अस्पताल की बदहाली पर मंत्री ने जताई नाराजगी

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। केंद्रीय पर्यटन एवं रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने शनिवार को शहर के मध्य नवनिर्मित आयुर्वेदिक अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने व्यवस्थाओं की कमी से बदहाल पड़े अस्पताल पर वित्त और आयुष सचिव को फोन कर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और शीघ्र अस्पताल का संचालन शुरू कराने के निर्देश दिये।

निरीक्षण के दौरान केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा कि करीब एक साल पहले उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया था, उस दौरान लिफ्ट लगाने की तैयारी चल रही थी। लेकिन आज निरीक्षण में लिफ्ट का दरवाजा बंद नजर आया। इसमें कहीं न कहीं मिस मैनेजमेंट है। धन अभाव के कारण अस्पताल बदहाल पड़ा है। कहा कि, 50 बेड वाला कुमाऊं का पहला आयुर्वेदिक अस्पताल है, जो केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से बना है। इसका संचालन होते ही मरीज यहां पंचकर्म, क्षारसूत्र जैसी थेरेपी का लाभ ले सकेंगे।

निरीक्षण के जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह गुंज्याल ने मंत्री अजय भट्ट को बताया कि शासन से बजट आवंटन न होने के कारण अस्पताल में बेड और फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। मशीनें लगाने का काम भी अधूरा पड़ा है। इस पर मंत्री भट्ट ने आयुष सचिव पंकज कुमार पांडेय को फोन पर किया तो उन्होंने वित्त से बजट में अड़ंगा लगने की बात कही। इस पर मंत्री ने वित्त सचिव आनंद वर्धन से वार्ता कर शीघ्र बजट आवंटन करने को कहा। साथ ही आयुष सचिव को चिकित्सकों के पद सृजित करने के निर्देश भी दिये। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट, सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी, चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप सिंह मेहरा, डॉ. केके पांडे, सीएसडीएम मनीष कुमार, तहसीलदार संजय कुमार आदि मौजूद रहे।

सीएम से कमी पेशी को पूरा करने का अनुरोध
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने आयुर्वेदिक अस्पताल की बदहाली से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अवगत कराया और कमी पेशी को शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया। अजय भट्ट ने कहा कि उन्हें आशा है कि मुख्यमंत्री शीघ्र इसका संज्ञान लेंगे। जल्द ही अस्पताल हम सब की आकांक्षाओं की पूर्ति करेगा।

चिकित्सकों की कमी से बंद हुए दो रेफरल सेंटर
जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह गुंज्याल ने मंत्री अजय भट्ट को बताया कि जनपद में चिकित्सकों के अभाव के कारण भवाली और कोटाबाग रेफरल सेंटर को बंद कर दिया गया। ये बात सुनकर मंत्री पारा चढ़ गया। उन्होंने शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों को शीघ्र पद सृजित करने के निर्देश दिये।

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