बरेली: 16 साल बाद बदल रहे समीकरण, इस बार मेयर की सीट सामान्य महिला !
मेयर पद पर महिला की ताजपोशी की तैयारी होने की चर्चाओं से दावेदारों में खलबली
बरेली, अमृत विचार। निकाय चुनाव की गली-गली में चर्चाएं शुरू हो गईं। इस बार मेयर सीट के बदलने को लेकर भी कयासबाजी चल रही है। अभी तक मेयर सीट ओबीसी होने की चर्चा थी, लेकिन मंगलवार को बरेली से लेकर लखनऊ तक मेयर पद पर महिला की ताजपोशी की तैयारी होने की चर्चाएं आम हो गईं। बरेली मेयर की सीट ''सामान्य महिला'' आरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मेयर सीट महिला के लिए आरक्षित होने के बाद दावेदारों में मायूसी छा गई है। महापौर का चुनाव लड़ने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन पुरुषों ने ही किए हैं। अब महिला सीट होने की खबर के बाद सपा और भाजपा में कद्दावर महिलाओं की तलाश तेज हो गई है। 2006 में बरेली में पहली महिला मेयर सुप्रिया ऐरन बनी थीं।
इसके बाद अब 2022 में मेयर की सीट महिला होने की चर्चा तेज है। इस बार सामान्य महिला मेयर का चुनाव लड़ सकेगी। इस बात की अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन ज्यादा संभावना महिला सीट ही होने की बात कही जा रही है। महिला सीट होने से दोनों प्रमुख दलों के पुरुष प्रत्याशियों को मायूसी हाथ लगी है। कुछ पुरुष प्रत्याशियों ने अपनी पत्नियों को चुनाव लड़ाने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि भाजपा में कुछ महिलाओं ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए दावेदारी को कदम बढ़ाया है।
भाजपा से ये महिलाएं हैं दावेदार
शशि बाला राठी, निवेदिता श्रीवास्तव, दीप्ति भारद्वाज और मेयर की पत्नी सोनल गौतम। हालांकि, इनके नाम की सिर्फ अभी चर्चा है। मेयर सीट सामान्य महिला हुई तो अभी तक इन महिलाओं की ही प्रबल दावेदारी मानी जाएगी।
सपा में चार महिलाओं ने किया है आवेदन
सपा से चार महिलाओं ने आवेदन किया है, लेकिन उनके नाम का खुलासा चुनाव प्रभारी ने नहीं किया है। सपा से माना जा रहा है कि सुप्रिया ऐरन चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन उन्होंने आवेदन नहीं किया है। सपा का इतिहास रहा है कि आवेदन करने वाले लोगों को बहुत कम बार टिकट दिया है। यहां अधिकतर प्रत्याशी अचानक और ऊपर से तय होकर आते हैं।
भाजपा दूसरे दल से सशक्त महिला प्रत्याशी का भी कर सकती है चयन
महिलाओं के दावेदारी के बीच भाजपा दूसरे दलों में भी सक्रिय महिला पर दांव खेल सकती है। राजनीतिक क्षेत्र में चर्चा हो रही है भाजपा की नजर में विरोधी दल की एक महिला ऐसी हैं, जिसके पति भी राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी साफ छवि भी है, उस पर दांव लगा सकती है।
अभी कयासबाजी है। पहले आरक्षण तो घोषित होने दीजिए। अभी सब कुछ पिटारे में छिपा है और पिटारे में बहुत कुछ है। पत्नी का लड़ना अभी तय नहीं है। इसका फैसला पार्टी करेगी---डा. उमेश गौतम, मेयर।
हर बार चुनाव लड़ना शोभा नहीं देता। हर चुनाव सुप्रिया या प्रवीण सिंह ऐरन ही लड़ें। विधानसभा चुनाव में हम कम वोट से हारे हैं। पार्टी में और भी कार्यकर्ता हैं। उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। इस बार चुनाव लड़ने में इंट्रेस्ट नहीं है---प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व सांसद।
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