रामपुर : धान खरीद में फर्जीवाड़ा, दलाल-राइस मिलर्स और केंद्र प्रभारी मचा रहे लूट

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Edited By Amrit Vichar
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रामपुर जिले के धान खरीद केंद्रों पर मनमानी हावी, हजारों रुपये कमाकर ले जा रहे हैं केंद्र प्रभारी

रामपुर, अमृत विचार। धान खरीद में नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। मंडियों के बाहर समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत पर सीधे धान खरीदा जा रहा है, जबकि नियमानुसार मंडी से आठ किलोमीटर के दायरे में सीधी खरीद नहीं की जा सकती। सेंटरों पर दलाल और केंद्र प्रभारी फर्जीवाड़ा करने में लगे हैं। हाल यह है कि मनमानी की वजह से सरकारी केंद्रों पर धान की आवक न के बराबर है। आरोप यहां तक है कि केंद्र प्रभारी हजारों रुपये रोज कमाकर ले जा रहे हैं। आश्चर्य यह है कि रजिस्ट्रेशन के बाद भी कैसे मनमानी की जा रही है, जिसे अधिकारी नजरंदाज कर रहे हैं।   

  • दलाल किस्म के किसानों ने भी अपनों को ही लूटना शुरू कर दिया
  • रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी धान खरीद में चल रही है मनमानी 

 जिले की मंडियों और धान खरीद केंद्रों पर आवक रफ्तार नहीं पकड़ रही है। हालांकि सरकारी क्रय केंद्रों पर अब तक धान खरीद में फर्जीवाड़ा होने के भी आरोप हैं। धान खरीद ऐसे किसानों के नाम पर की जा रही है जिनके पास धान की खेती ही नहीं है। दूसरी तरफ किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मंडी एक्ट के तहत नियम है कि मंडी परिसर से आठ किलोमीटर के दायरे में सीधी खरीद नहीं होगी, लेकिन इन दिनों राइस मिलर्स मनमाने तरीके से सीधी खरीद कर रहे हैं। कुछ राइस मिलें हैं, जहां सीधी खरीद की जा रही है। स्वार-टांडा क्षेत्र में सीधी खरीद का सबसे बड़ा खेल चल रहा है। 2040 रुपये समर्थन मूल्य के मुकाबले 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल के दाम ही किसानों को दिए जा रहे हैं। आलम ये है कि मंडियों में कम और मिलों में कई गुना धान पहुंच रहा है। खरीद केंद्रों पर दलाल हावी है, इन दलालों में कुछ किसान टाइप भी लोग हैं, जोकि केंद्र प्रभारियों की साठगांठ से ऐसा काम कर रहे हैं।

बिना उपकरण हाथ से मापी जा रही है धान में नमी
धान खरीद में नमी की सबसे अहम भूमिका रहती है। सरकारी मानकों के अनुसार 17 फीसदी से ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। नमी मापने के लिए ग्रेनपो जैसे उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन मिलर्स द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा। उपकरण की जगह हाथ से छूकर धान में नमी का प्रतिशत बता दे रहे हैं।

लक्ष्य की आधी भी नहीं हुई खरीद
किसानों से धान खरीदने के लिए जिले भर में कुल 138 क्रय केंद्र खोले गए हैं। जिले में तीन लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष अभी मात्र 65 हजार मीट्रिक टन धान खरीद ही हुई है। टांडा में 27 हजार क्विंटल के सापेक्ष 12 हजार क्विंटल धान खरीदा जा सका है। टांडा एसएमआई सीमा गुप्ता ने बताया कि 11 सेंटर हैं, छह सेंटर मंडी में हैं। 31 जनवरी तक खरीद होनी है, उम्मीद है ढाई माह में लक्ष्य पूरा हो जाएगा। स्वार में पीसीएफ गोदाम में संचालित विपणन विभाग के खरीद केंद्र पर मौजूद एसएमआई पुष्पेंद्र ने बताया कि 23 हजार क्विंटल का लक्ष्य है 5 हजार क्विंटल धान खरीद हुई है। इसी तरह से बिलासपुर, मिलक और शाहबाद से भी सूचनाएं हैं कि धान खरीद लक्ष्य से बहुत कम है। जोकि अधिकारियों की लापरवाही साबित कर रही है। इससे साबित हो रहा है कि किसानों का धान दलाल खरीद रहे हैं। या फिर नियम विरुद्ध राइस मिलर्स खरीद रहे हैं। राइस मिलर्स मंडी के बाहर ही ट्रालियों को अपनी मिलों पर बुलाकर तौल करा रहे हैं। जिससे मंडी शुल्क को भी चूना लगाया जा रहा है।

मिलीभगत से होता है घोटाला
धान खरीद में घोटाला राशन माफियाओं व धान खरीद केंद्र प्रभारी की मिलीभगत से घोटाला किया जाता है। दरअसल केंद्र प्रभारी आने वाले किसानों की धान में तमाम कमियां निकाल उन्हें वापस लौटा देते हैं तो कुछ किसानों को लंबा वेट कराते हैं। ऐसे में परेशान होकर किसान केंद्र के पास घूम रहे राशन माफियाओं को ही कम कीमत पर उन्हें धान बेच देते हैं। जिन्हें वह बाद में दूसरे किसानों के नाम व फर्जी कागज लगाकर बेचने का काम किया जाता है।

किसान का रजिस्ट्रेशन होता है, जिसका सत्यापन एसडीएम करते हैं। जो किसान रजिस्ट्रेशन कराते हैं उन्ही का धान खरीदा जाता है। उन्हीं के आधार कार्ड से लिंक खाते में रुपये जाते हैं। जो किसान आएगा उसका धान खरीदना मजबूरी है, केंद्र प्रभारी मना नहीं कर सकता है। अगर कोई फर्जीवाड़ा है तो नाम के रजिस्ट्रेशन के आधार पर जांच करके पता कराएंगे। -डॉ. अनुपम निगम, जिला विपणन अधिकारी
 

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